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Monday, October 25, 2021

बुद्ध को राजनीति की कितनी समझ थी?

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आपको लगता है कि बुद्ध की समझ राजनीति के लायक नहीं थी? पिता शुद्दोधन के इतने प्रयास के बाद भी उनका मोह सत्ता और राजपाट से ऐसे ही छूट गया था? आपको लगता है कि इस दुनिया की बुद्ध को उतनी समझ नहीं थी, जितनी की मार्क्स, लेनिन, मोदी और ट्रम्प को है? 

बुद्ध की समझ सबसे आगे कैसे थी?

सच मानिए बुद्ध की समझ इन सबसे आगे की थी… सत्ता और राजनीति जैसी आज है वैसी ही बुद्ध के समय में भी थी… उस समय भी राजा शुद्धोधन और उनके “शाक्य वंश” की साख दांव पर लगी रहती थी… उन लोगों को भी शाक्य होने पर गर्व होता था… वो भी ऐसे ही थे… जैसे कि हम और आप हैं… बुद्ध ने अपने पिता और उनकी सत्ता को समझ लिया था.. उन्हें पता था कि आज इन्हें शाक्य होने पर गर्व है… कल हिन्दू होने पर होगा… फिर मुसलमान होने पर होगा… फिर भारतीय और नेपाली… फिर भाजपाई और कांग्रेसी… फिर राष्ट्रवादी और राष्ट्रद्रोही… कम्युनिस्ट और लिबरल होने पर गर्व… ये इनका गर्व और इनकी नीति कभी रुकने वाली नहीं है और यही सारी पीड़ा है… जो बुद्ध के समय शाक्य नहीं थे वो पीड़ित थे… जैसे आज कहीं और जो अल्पसंख्यक हैं वो पीड़ित हैं।

बुद्ध की समझ ज्यादा गहरी कैसे थी?

इसलिए बुद्ध की समझ आप से कहीं गहरी थी… वो पलायनवादी नहीं थे वो आपकी मूढ़ताओं से पलायन चाहते थे… आपको लगता है कि उनको भी आपके जैसे धरने और प्रदर्शन कर के जीवन बिता देना चाहिए था… गरीबों की सेवा करते और सरकार का विरोध या समर्थन में जीवन लगा देते, तो सही था… नहीं… कुछ भी इससे नहीं बदलता… बुद्ध ने इन सारी परेशानियों की जड़ को ढूंढने की कोशिश की और आपको उसका समाधान दिया।

समाधान सत्ता में आने या निकल जाने से नहीं होगा!

इसलिए मेरा ध्यान आपकी इस राजनीति में नहीं होता है… मुझे पता है कि समस्या कहीं और है… आपकी इतनी क्रांतियों के बावजूद समूचे विश्व में कभी शान्ति स्थापित नहीं हो पायी है… और विश्व में एक आग कहीं जलती है तो धीरे-धीरे आपकी कुछ दिनों की तथाकथित शान्ति को चपेट में ले लेती है… एक इस्लाम आया और उसके मानने वालों ने सारे पैंतरे लगा दिए उस धर्म को “वो” बताने में जो वो दरअसल था ही नहीं और आज है भी नहीं, क्योंकि उन्होंने समस्या को समस्या की तरह नहीं देखा। अब समूचा विश्व एक छोटे से कस्बे से उपजे इस धर्म के विरोध में जूझ रहा है… ऐसे ही पहले ईसाइयत था, ऐसे ही आगे हिंदुत्व भी होगा… आपको लगता है कि समाधान किसी के सत्ता में आने या निकल जाने से होगा, तो ऐसा कुछ भी नहीं है।

अंधा अंधे को रास्ता नहीं दिखाता!

ये जो मूर्छित लोगों द्वारा शान्ति मार्च निकाले जाते हैं इनका कोई मोल नहीं होता। दरअसल… बुद्ध के पिता भी मूर्छित ही थे… शाक्यों के रक्षक… आपके नेता भी वही हैं… आपके न्यूज़ चैनल और आपकी मीडिया व उसके बड़े-बड़े बुद्धिजीवी वही हैं… आपको लगता है कि ये लोग आपको समाधान दे रहे हैं मगर ऐसा कुछ नहीं है… बस अंधा अंधे को रास्ता दिखा रहा है।

बुद्ध ही एकमात्र उपाय हैं… बुद्ध को और करीब से जानना शुरू कीजिये… जानिये कि हमारे विश्व की इस अफरा-तफरी का मूल क्या है? इन सबके पीछे क्या मनोविज्ञान काम कर रहा है? और वो क्या समाधान है जो बुद्ध ने सुझाया है…? ये सारे पीर, ये सारे पैगम्बर, ये सारे अवतार, सब समस्या हैं… समाधान नहीं…! ईश्वर से परे बुद्ध की खोज ही विश्व शान्ति का एकमात्र समाधान है… अपने बच्चों को इसे बताइये… उन्हें मोदी, योगी और ओवैसी से दूर ले जाईये… ये सब मूर्छित हैं और उतने ही मंदबुद्धि भी जितना कि कोई भी आम मंदबुद्धि इंसान…!!!

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