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बुधवार, अप्रैल 14, 2021

रंग-रूप का भेदभाव, अमेरिका ने क्यों भुला दिया?

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Apartheid meaning in Hindi: एक समय ऐसा भी था जब अमेरिका में रंग-रूप का भेदभाव अपनी चरम पर था। असल में जब अमेरिका की खोज की गई, तो सबसे पहले अंग्रेजों ने वहाँ कब्ज़ा जमा लिया और वहां के स्थानीय आदिवासियों को खूब मारा-पीटा। फिर उन्होंने अपनी सेवा के लिए अफ्रीका से गुलाम मंगाए, जिन्हें ‘नीग्रो’ कहा जाता था। उन गुलामों को भी खूब प्रताड़ित किया जाता था।

लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद उस समाज में जागृति आई, अपने द्वारा की गयी गलती का बोध हुआ और फिर वे समानता की बात करने लगे।

आपको आश्चर्य होगा कि आज वहाँ ‘नीग्रो’ शब्द बोलना भयंकर अपराध माना जाता है। क्योंकि अब वे अपने काले इतिहास को पूरी तरह से भूल जाना चाहते हैं।

यदि आप अमेरिका जाएँ, तो किसी काले व्यक्ति को ‘नीग्रो’ भूल कर भी मत बोलिएगा, इस नस्ल वादी टिप्पणी के लिए आपको जेल हो सकती है।

apartheid meaning in hindi रंग-रूप का भेदभाव

Apartheid meaning in Hindi: अब जरा गौर कीजिये कि जो कल तक अमेरिका में नस्लवाद या रंग-रूप का भेदभाव था, वही हमारे देश में जातिवाद की शक्ल के रूप में मौजूद है।

तो क्या हमें भी कुटिलता पूर्वक समाज को बांटने वाले जातिवाद को खत्म नहीं कर देना चाहिए?

आज अमेरिका व अन्य यूरोपीय देशों की चँहुमुखी विकास का एक ही कारण है और वह है, शिक्षा!

जैसे-जैसे वे शिक्षित होते चले गए, उन्होंने पोप-पादरियों से अपना पिंड छुड़ाना ही मुनासिब समझा। आज वहाँ के चर्च खाली पड़े रहते हैं, सिर्फ टूरिस्ट ही घूमने व उसकी भव्यता देखने जाते हैं, उस में प्रार्थना करने वाले तो कभी-कभार इक्का-दुक्का ही आते है।

चर्च और मिशनरी द्वारा जिस ईसाइयत को पहले पूरी दुनियाँ में फैलाने के लिए पोप-पादरी साम-दाम-दंड-भेद अपना रहे थे। आज वे बेजार है, खुद ईसाई ही उन्हें छोड़कर सामजिक सामंजस्य और मानवता की सेवा की तरफ मुड़ गए हैं।

तो क्या हम भी ऐसा ही नहीं कर सकते?

~कमल झँवर

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