Famous atheist | 15 Top atheists in the world (in Hindi)

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15 Famous atheist के धर्म या मजहब पर उनके विचार। जिन्होने कहा कि “दूसरो के लिये वही व्यवहार करो जिस की कामना आप दूसरो से करते हैं। जिनका कहना था कि “भाग्‍य नहीं कर्म है सफलता का मूल मंत्र“। और यह भी कि “हमें जीना है तो औरो की जिंदगी से खिलवाड़ मत करो। जानिए ऐसे 15 top atheists in the world या Famous atheist के बारे में जिन्होंने मानव सभ्यता को अलग राह दिखाई।

15 Top atheists in the world – Famous atheist in hindi

  1. आचार्य चार्वाक का कहना था- “ईश्वर एक रुग्ण विचार प्रणाली है, इससे मानवता का कोई कल्याण होने वाला नहीं है”।
  2. अजित केशकम्बल (523 ईसा पूर्व) अजित केश्कंबल बुद्ध के समय कालीन विख्यात तीर्थंकर थे, त्रिपिटीका में अजित के विचार कई जगह आये हैं, उनका कहना था- “दान, यज्ञ,  हवन नहीं… लोक परलोक नहीं…।
  3. सुकरात (466-366 ईसा पूर्व) “ईश्वर केवल शोषण का नाम है”।
  4. इब्न रोश्द (1126-1198) इनका जन्म स्पेन के मुस्लिम परिवार में हुआ था, रोश्द के दादा जामा मस्जिद के इमाम थे,
    इन्हें क़ुरान कंठस्थ थी। इन्होने अल्लाह के अस्तित्व को नकार दिया था और इस्लाम को एक राजनीतिक गिरोह बताया था।
    जिस कारण मुस्लिम धर्मगुरु इनकी जान के पीछे पड़ गए थे।
    रोश्द ने दर्शन के बुद्धि प्रधान हथियार से इस्लाम के मजहबी वादशास्त्रियों की खूब खबर ली थी।
  5. कॉपरनिकस (1473-1543) इन्होने धर्म गुरुओं की पोल खोली थी,
    इसमें धर्म गुरु ये कह कर लोगों को मूर्ख बना रहे थे कि सूर्य पृथ्वी का चक्कर लगाता है।
    कॉपरनिकस ने अपने प्रयोग से यह सिद्ध कर दिया था
    कि पृथ्वी सहित सौर मंडल के सभी ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं,
    जिस कारण धर्म गुरु इतने नाराज हो गए कि
    कॉपरनिकस के सभी साथ के वैज्ञानिको को कठोर दंड देना प्रारंभ कर दिया।
  6. मार्टिन लूथर (1483-1546) इन्होने जर्मनी में अन्धविश्वास,
    पाखंड और धर्म गुरुओं के अत्याचारों के खिलाफ आन्दोलन किया।
    इन्होने कहा था “व्रत, तीर्थयात्रा, जप, दान आदि सब निरर्थक है”।
  7. सर फ्रेंसिस बेकन (1561-1626) अंग्रेजी के सारगर्भित निबंधो के लिए प्रसिद्ध, 23 साल की उम्र में ही पार्लियामेंट के सदस्य बने,
    बाद में लार्ड चांसलर भी बने। उनका कहना था कि-
    नास्तिकता व्यक्ति को विचार, दर्शन, स्वाभाविक निष्ठा, नियम पालन की और ले जाती है, ये सभी चीजें सतही नैतिक गुणों की पथ दर्शिका होती है”।
  8. बेंजामिन फ्रेंकलिन (1706-1790) इनका कहना था “सांसारिक प्रपंचो में मनुष्य धर्म से नहीं बल्कि इनके न होने से सुरक्षित है”।
  9. चार्ल्स डार्विन (1809-1882) इन्होने ईश्वरवाद और धार्मिक गुटों पर सर्वाधिक चोट पहुंचाई,
    इनका कहना था “मैं किसी ईश्वरवाद में विश्वास नहीं रखता और न ही आगामी जीवन के बारे में”।
  10. कार्ल मार्क्स (1818-1883) कार्ल मार्क्स का कहना था “ईश्वर का जन्म एक गहरी साजिश से हुआ है!” और “धर्म एक अफीम है!” उनकी नजर में धर्म- विज्ञान विरोधी, प्रगति विरोधी, प्रतिगामी, अनुपयोगी और अनर्थकारी है। इसका त्याग जनहित में जरूरी है।
  11. पेरियार (1879-1973) इनका जन्म तमिलनाडु में हुआ था। इन्होने जातिवाद, ईश्वरवाद, पाखंड, अन्धविश्वास पर जम कर प्रहार किया।
  12. अल्बर्ट आइन्स्टीन (1879-1955) विश्वविख्यात वैज्ञानिक का कहना था “व्यक्ति का नैतिक आचरण मुख्य रूप से सहानभूति, शिक्षा और सामाजिक बंधन पर निर्भर होना चाहिए, इसके लिए धार्मिक आधार की कोई आवश्यकता नहीं है। मृत्यु के बाद दंड का भय और पुरस्कार की आशा से नियंत्रित करने पर मनुष्य की हालत दयनीय हो जाती है”।
  13. गौतम बुद्ध –  बुद्ध से जब पूछा गया था कि ईश्वर है या नहीं तब वो मौन हो गए। उनका कहना था कि ईश्वर के लिये अपना समय नष्ट मत करो। अप्प दीपो भवः!!
  14. व्लादिमीर लेनिन – लेनिन के अनुसार “जो लोग जीवन भर मेहनत मजदूरी करते हैं तथा अभाव में जीते हैं उन्हें धर्म इस जीवन में विनम्रता और धैर्य रखने तथा परलोक में सुख की आशा रखने के लिए सांत्वना प्राप्त करने की शिक्षा देता है, लेकिन जो लोग दूसरों के श्रम पर जीवित रहते हैं, उन्हें इस जीवन में दयालुता की शिक्षा देता है, इस प्रकार उन्हें शोषक के रूप में अपने सम्पूर्ण अस्तित्व का औचित्य सिद्ध करने का एक सस्ता नुस्खा दे देता है”।
  15. भगत सिंह (1907-1931) प्रमुख स्वतन्त्रता सेनानी भगत सिंह ने अपनी पुस्तक “मैं नास्तिक क्यों हूँ?
    में कहा है कि “मनुष्य ने जब अपनी कमियों और कमजोरियों पर विचार करते हुए अपनी सीमाओं का अहसास किया
    तो मनुष्य को तमाम कठिनाईयों का साहसपूर्ण सामना करने और तमाम खतरों के साथ वीरतापूर्ण जुझने की प्रेरणा देने वाली तथा सुख दिनों में उच्छखल न हो जाये इसके लिए रोकने और नियंत्रित करने के लिए ईश्वर की कल्पना की गयी है
    ”।

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