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सोमवार, मई 17, 2021

Buddh ki ahinsa aur karuna par baat karna kyon jaruri hai?

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मैं जब भी Buddh Ki Ahinsa एंव करुणा पर बात करता हूँ। तभी कुछ लोग मुझे बताने लगते हैं कि बौद्ध धर्म में भी कोई विराथु भिक्षु है। जिसने म्यांमार में लोगों का नरसंहार किया है। अतः मेरा Buddh Ki Ahinsa एंव करुणा की बातें करना बेमानी है। तो आज मैं आपकी इस शंका का समाधान कर ही देता हूँ।

क्या इस्लाम की शुरुआत से बात करना ठीक रहेगा?

बात सन 627 की है, मदीना में बनू क़ुरैज़ा नाम का एक यहूदी कबीला होता था। जो मक्का वालों से मिल गया था और पैग़म्बर मुहम्मद और उनके साथियों को हराना चाहता था। ये जिक्र थोड़ी तफ़सील से है। बस इसका संक्षेप ये हैं कि जब बनू क़ुरैज़ा क़बीले ने मक्का वालों की जासूसी करना नहीं छोड़ा। तो पैग़म्बर मोहम्मद और उनके साथियों ने सबको बंदी बना लिया।

हदीस में दर्ज़ बयान के मुताबिक़

सात-आठ सौ मर्द लोग थे जिन्हें बंदी बनाया गया और उनके औरतों और बच्चों को अलग कर दिया गया। हदीस के मुताबिक़ पैग़म्बर ने कहा एक बड़ा सा लंबा गड्ढा खोदा जाये। फिर उनके हुक्म पर गड्ढा खोदा गया। फिर मर्द और ऐसे बच्चों को जिनके जननांग पर बाल आ गए थे। एक-एक कर के हाथ बाँध कर लाया गया और पैग़म्बर ने ख़ुद उनके गला काटने का काम शुरू किया। वो खुद एक-एक व्यक्ति की गर्दन रेत कर उसे गड्ढे में डाल रहे थे। अब सात-आठ सौ लोगों का गला काटना आसान भी नहीं था। ये करते-करते शाम हो गयी। जब पैग़म्बर थक गए तब उन्होंने ये काम दूसरों को सौंप दिया। मगर ज़्यादातर के गले उन्होंने ख़ुद काटे थे। सारे मर्दों के गले काटने के बाद उनकी लाशों के ऊपर गड्ढे को मिट्टी से भर दिया गया।

उनके सामान और दूसरी चीजों को पैग़म्बर के साथियों में बराबर-बराबर बाँट दिया गया। जिसको जो औरत पसंद आई, उसे वो औरत दे दी गयी।

कौन सी हदीस में इस घटना का वर्णन है?

कई हदीसों में इस घटना के बारे में विस्तार से लिखा गया है। बुख़ारी, अबू दाउद, तबरई, तफ़सीर इब्न क़सीर ये सभी हदीसें इस्लामिक जगत में बहुत मशहूर हैं। और ये इस्लाम की Authentic (प्रामाणिक) किताबें हैं, जिसमें इस घटना का विस्तार से जिक्र है। ये सारी हदीसें सहीह है, जिस पर कोई भी उलेमा या आलिम संदेह नहीं करता है। क्योंकि इस्लामिक इतिहास की ये एक बहुत मशहूर घटना है। जिसने भी थोडा-बहुत इस्लाम का इतिहास पढ़ा है। वो इस घटना के बारे में जानता है। मैं इस घटना पर अपना कोई जजमेंट नहीं देने वाला हूँ। मैंने ये घटना यहाँ जस की तस रख दी है। वैसे ये घटना बहुत ही दर्दनाक तरीक़े से भिन्न भिन्न इस्लामिक किताबों में दर्ज़ है। लेकिन मैं उतनी डिटेल में नहीं गया बस आपको मोटा-मोटा बता दिया। वैसे इसकी डिटेल बहुत ही भयावह है।

ये जबरन अपनी विचारधारा मनवाने की लड़ाई है!

पैग़म्बर ने अपनी उम्र के आख़िरी दस सालों में उन्तीस (29) लड़ाईयां लड़ीं थी। कहीं अपना धर्म बचाने के लिए कहीं अपने धर्म का विस्तार करने के लिए। इसके बाद पैग़म्बर जब इस दुनिया से चले गए तो सिर्फ़ लड़ाईयां हुई। उनके जाते ही खलीफ़ाओं ने उन लोगों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया। जिन्होंने इस्लाम को मानने से इन्कार किया। और ये लड़ाई अभी तक इक्कीसवीं सदी में “बगदादी” ख़लीफा द्वारा भी लड़ी जा रही थी। कहने का मतलब कि इस्लाम के इतिहास में सिर्फ़ खून-खराबा हुआ है कोई अहिंसा कोई करुणा ढूंढें नहीं मिलती। मैंने तो बीस साल इस्लाम के इतिहास का बहुत गहन अध्ययन किया है। इसलिए मैं इस विचारधारा की एक-एक रग से वाकिफ़ हूँ।

क्या विराथु बौद्ध धर्म के जेहादी हैं?

बौद्ध धर्म में एक अशीन विराथु आया और मुसलमान सिर्फ़ उसी की बात करते हैं। जब कोई बुद्ध की अहिंसा एंव करुणा की बात करेगा तो ये वहां जा कर विराथु का नाम लेंगे। बुद्ध के आसपास या सदियों में ऐसा कोई नहीं आया है। बुद्ध इस्लाम से (1000) एक हज़ार साल पहले आये थे। इतने पुराने होने के बावजूद किसी भी बुद्धिस्ट ने बुद्ध के नाम पर लोगों से कभी कोई “जेहाद” नहीं किया। अशीन विराथु भी ये नहीं कह सकते हैं कि वो बौध धर्म के लिए जेहाद कर रहा है। क्योंकि बौद्ध धर्म में इस तरह की हिंसा को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी “विचारधारा” नहीं है। विराथु पूरी तरह से इसकी ज़िम्मेदारी ख़ुद पर लेता है और अपने अस्तित्व की रक्षा का बहाना देता है। उसे अभी तक किसी ने भी जस्टिफाई नहीं किया है!

क्या विराथु बौद्धों के हीरो हैं?

आप यहाँ के “उग्र” बहुसंख्यकों को देखेंगे कि वो ‘विराथु’ की डीपी लगाए मिलेंगे, किसी बौध को नहीं।
ये उग्र हिंसक बहुसंख्यक उसी विचारधारा को अपनी कौम के भीतर लाने को मरे जा रहे हैं।
ये लोग बौध नहीं हैं। ये यहाँ के उग्रवादी संगठन वाले हैं जिनका हीरो “Ashin Wirathu” है। विराथु बौद्धों के हीरो नहीं है।

अपने इतिहास को मत झुठलाइए!

इसलिए, विराथु का “ताना” मारने से पहले अपना इतिहास पढ़िए, अपनी गिरहबान में झांकिए। मैं चाहता तो बनू क़ुरैज़ा का इतिहास छोड़ कर खलीफाओं के हिंसा की बात करता। मगर वो यहां ग़लत होता क्योंकि आपको हक़ीक़त बताना ज़रूरी है! आप बुद्ध को गाली देते हैं, उन्हें भगौड़ा बोलते हैं। अपने कम्युनिस्ट दोस्तों के विचारों के असर की वजह से यशोधरा के साथ हुई ज्यादती पर रोते हैं। मगर आप बनू क़ुरैज़ा की औरतों की बात नहीं करते हैं। और ऐसे (28) अट्ठाईस युद्धों की बात नहीं करते हैं, जिनकी बंदी औरतों के साथ बनू क़ुरैज़ा की तरह ही व्यवहार हुआ था। वो पैग़म्बर के द्वारा माल-ए-ग़नीमत के तौर पर ऐसे ही “बाटीं” जाती थीं। दिन में उनके पति और परिवार के लोग मारे जाते थे उसी रात उन्हें बिस्तर पर रौंदा जाता था।

सोच कर देखिये अपने इस धर्म के बारे में और इसकी शिक्षा के बारे में, लेकिन आप सोचेंगे नहीं।
मुझे पता है, फिर भी सोचने की थोड़ी सी कोशिश कीजिये।
लेकिन आप अपने इतिहास को झुठलाएँगे और बुद्ध को यशोधरा के लिए कोसेंगे।
कम्युनिस्ट क्या कहते हैं वो छोड़िए, आप पहले अपना इतिहास उठा कर पढ़िए!
आपकी ख़ुद की छलनी में इतने छेद हैं! कि विराथु का ताना मारने से पहले आप ख़ुद शर्म से पानी-पानी हो जायेंगे।

मैं Buddh Ki Ahinsa एंव करुणा पर बात क्यों करता हूँ?

बुद्ध वो हैं जिन्हें मानकर और जानकार अशोक जैसा हिंसक राजा हिंसा त्याग कर अहिंसक बन जाता है,
उन्हें पढ़कर और जानकार कोई हिंसक हो जाए तो ये उनके भीतर का मनोरोग है।
अब विराथु का अपना मनोरोग है उसमें Buddh Ki Ahinsa एंव करुणा की शिक्षा का कोई “दोष” नहीं है।
इसलिए, उम्मीद है अब आप विराथु का नाम मेरे सामने नहीं लेंगे।

नहीं तो गज़वा पर तीन सौ आर्टिकल की सीरीज लिख कर समझाऊंगा कि किस तरह की हिंसा हुई है,
इस्लाम फैलाने के नाम पर और कितना ज़ुल्म हुआ है दुनिया की हर कौमों के साथ।

और अंत में

इस्लाम पर लिखना अब मैंने बंद कर दिया है,
ये आपके लिए भी अच्छा है और मेरे लिए भी कि चुप रहिये।
क्योंकि ऐसी गंद, ऐसी हिंसा, ऐसी बर्बर सभ्यता को मैंने “प्रणाम” कर के उस से अपना पीछा छुड़ा लिया है।
मैं और मेरे बच्चों की नस्लों के “आदर्श” अब हिंसक और बर्बर लोग नहीं होंगे,
अब आपका रास्ता अलग है और मेरा अलग।
इसलिए मुझे अब अपने हिंसक पचड़े में मत खीचिये, और अगर खींचिएगा तो जवाब माकूल मिलेगा।
क्योंकि बुद्धिस्ट होने पर मेरी Islam Ke Itihaas की याददाश्त ग़ायब नहीं हो गयी है।

~ताबिश सिद्धार्थ

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