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रविवार, मई 16, 2021

Buddh Poornima | क्या बौद्ध दर्शन अरब में था?

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Buddh Poornima पर विशेष:
ईसा से भी साढ़े पांच सौ साल पहले महात्मा बुद्ध आये थे लेकिन बाइबिल समेत ईसाईयों की किसी भी पुस्तक में बुद्ध का कोई ज़िक्र नहीं मिलता है… ये हमें बताता है कि जिस सभ्यता में ईसा आये वहां बुद्ध की शिक्षा नहीं पहुंची थी.. ईसाईयत की प्रतिस्पर्धा सिर्फ़ यहूदियत से थी, इसलिये बाइबिल यहूदियों की धार्मिक पुस्तक “तौरेत” का ही हिस्सा बन के रह गयी… ईसाईयत और यहूदी की श्रृंखला में इस्लाम आया… इस्लाम में भी बुद्ध का कहीं कोई ज़िक्र नहीं है… कितनी हदीसें, कितनी इस्लामिक इतिहास की किताबें हैं मगर उनमें कहीं भी एक बार भी बुद्ध या उन से संबंधित किसी घटना का कोई ज़िक्र नहीं मिलता है… जबकि अरब के लगभग हर देवी-देवता का कहीं न कहीं किसी न किसी किताब में ज़िक्र आता है… कुरान में भी अरब की देवियों के नाम आये हैं।

ये घटना हमें बताती है कि समूचे अफगानिस्तान समेत बहुत बड़े क्षेत्र में फैला बौद्ध धर्म, अरबी लोगों तक नहीं पहुंचा था… अगर पहुंचा होता तो अरबी भी बुद्ध की पूजा कर रहे होते… और तब शायद ईसाईयत और यहूदियत के “पैग़म्बरी” वाले कांसेप्ट से बाहर निकल चुके होते… मोहम्मद साहब के समकालीन ही कम से कम बीस और लोग थे जो “पैग़म्बर” होने का दावा करते थे… वहां बुद्ध का दर्शन पहुंचा ही नहीं था… लोग पैग़म्बरी की होड़ में फंसे थे क्योंकि यहूदियों और ईसाईयों के पास अपने पैग़म्बर थे मगर अरबों के पास नहीं थे… और ये उनके लिए बड़े शर्म और दुःख की बात थी।

Buddh ने पुराने युग को समाप्त कर दिया

बुद्ध ने ईसा से भी बहुत पहले देवदूत, पैग़म्बर, अवतार बनने के सारे दर्शन को जड़ समूल समाप्त कर दिया था… बुद्ध ने अपने आसपास के लोगों को इस से बाहर निकाल लिया था और उनके सामने हर तरह की पूजा और इबादत से आगे निकलकर ख़ुद के भीतर सब कुछ खोजने का मार्ग दिखाया था।

ये एक नए युग का सूर्य था जो बुद्ध के साथ उदय हुआ था… मगर अरब और उसके आस-पास ये प्रकाश नहीं पहुंचा और वहां अज्ञान का अंधेरा जस का तस बना रहा… भारत में ये प्रकाश भर चुका था मगर बुद्ध के जाने के बाद धीरे-धीरे “दुकानदारों” ने अपनी दुकानदारी बन्द होने बाद लोगों को पुनः धकेलकर उसी अंधकार की तरफ़ भेज दिया… अवतार और देवदूत की धारणा का खंडन करने वाले बुद्ध को “अवतार” बना कर उनके दर्शन को बड़ी चालाकी से पूरी तरह से नष्ट करने का प्रयास किया गया… मगर ये पूरी तरह सफ़ल नहीं हो पाया।

बुद्ध नया युग थे… हर तरह के परमेश्वर और ख़ुदा की इबादत को समाप्त करके नया दर्शन देने वाले…
क्योंकि हमारा ये मानना है कि “कहीं आसमान में कोई बैठा है जिसे हम सबको पूजना है”,
ये निहायत ही निचले स्तर की अपरिपक्व सोच थी जिस से बुद्ध ने हमें आज़ादी दिलाई थी।

इसलिए अगर हम बुद्ध की धरती पर पैदा हुए हैं
और अरब और उसके आस-पास की आदिम सोच या भारत के पुराने आदिम कर्मकांडो में
अभी भी हमें अपना उद्धार दिखता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है
तो इस से बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण हमारे लिए और कुछ भी नहीं हो सकता है।

आप सबको Buddh Poornima पर शत-शत बधाई और शुभकामनाएं!

आज Buddh Poornima है…
एक ऐसे व्यक्ति का जन्म जिसने युग बदल दिया…
इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ कि इस पृथ्वी पर बस दो युग हैं…
एक बुद्ध के पहले का युग और एक बुद्ध के बाद का…
बुद्ध के पहले अंधकार का युग था और बुद्ध के बाद प्रकाश का युग है।

आप सभी को प्रकाश के इस युग और हमारे सबसे प्रिय और आदर्श बुद्ध की Buddh Poornima की शत-शत बधाई और शुभकामनाएं !!

~ताबिश सिद्धार्थ

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