God is not great | ईश्वर महान नहीं है!

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Eeshvar

21वीं सदी में दुनिया में जो चार सबसे महान नास्तिक विचारक पैदा हुए हैं, उनमें रिचर्ड डॉकिंस के बाद जो सबसे बड़ा नाम आता है, वो है क्रिस्टोफर हिचन्स का। उन्होंने 2007 में “God is not great” नाम की एक किताब लिखी थी, इस किताब में सैकड़ों प्रमाण दे कर यह प्रमाणित करने की प्रयास किया था, कि आपका “God is not great यानि ईश्वर महान नहीं है!” क्योंकि पिछले 5000 साल में मानव जाति पर जितने भी भयंकर संकट आए हैं उस दौरान दुनिया के किसी भी (Eeshvar, Allaah, God) ईश्वर, अल्लाह या गॉड ने मानव जाति की कोई मदद नहीं की है।

मानव जाति में बमुश्किल 5% बुद्धिमान लोग हैं और उन्होने ही मानव जाति को हर संकट के समय कोई न कोई रास्ता ढूंढ कर दिया है।

लेकिन धर्म का धंधा एंव अपने आप को धर्म का ठेकेदार और तथाकथित ईश्वर (Eeshvar) का प्रतिनिधि कहने वालों ने मानव जाति के 95% लोगों को, जो कि जन्मजात बुद्धिहीन हैं, और बिना किसी काल्पनिक सहारे के जी नहीं सकते, जैसे लोगों को धर्म के मकड़जाल में जकड़ कर रखा हुआ है।

God is not great क्यों कहा गया?

Eeshvar

दुर्भाग्य से आज क्रिस्टोफर हिचेंस हमारे बीच नहीं है, लेकिन कोरोना वायरस ने फिर एक बार क्रिस्टोफर हीचेंस को सही साबित कर दिया है। और साथ ही यह भी साबित किया है कि कोरोना वायरस प्रकृति ने पैदा किया है, इंसान के पैदा किए हुए Eeshvar, Allaah aur God उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। सिर्फ विज्ञान ही है, जो उसे नियंत्रित कर सकता है।

सभी धर्मों के ठेकेदारों का यह सनातनी दावा है कि, ईश्वर ही इस ब्रह्मांड का निर्माता है वह सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ एंव हर जगह मौजूद है, उसकी मर्जी के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।

विश्व में सबसे बड़ा ईसाई धर्म है और ईसाइयों के सबसे बड़े गुरु इटली के रोम शहर में रहते हैं, जिसे वेटिकन सिटी कहा जाता है। और आज कोरोना के डर से इटली के सभी चर्च और वेटिकन सिटी लॉक डाउन हैं उनका सबसे बड़ा धर्म गुरु यानी पोप कहीं छुप कर बैठा है। विश्व का दूसरा बड़ा धर्म इस्लाम है, विश्व भर में फैले मुसलमानों की सबसे पवित्र भूमि और पवित्र धर्मस्थल मक्का है, वह भी आजकल पूरी तरह से बंद है। और दुनिया के तीसरे नंबर का धर्म यानी हिंदू धर्म और उसके सभी प्रसिद्ध धर्मस्थल जैसे कि चारों धाम, बालाजी मंदिर, शिर्डी वाले साईं बाबा का मंदिर, जम्मू के वैष्णो देवी का मंदिर और बहुत सारे छोटे-मोटे मंदिर आज पूरी तरह से लॉक डाउन हैं।

विश्व के किसी भी धर्म व किसी भी Bhagavaan में इतनी ताकत नहीं है कि वह कोरोना नाम के मामूली से वायरस को रोक सकें।

Eeshvar, Allaah या God ही पाखंड का दूसरा नाम है!

कोरोना ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि Eeshvar, Allaah या God ही पाखंड का दूसरा नाम है। धर्म के ठेकेदारों ने बुद्धिहीन लोगों के अज्ञान और डर का सदैव फायदा उठाकर, उनका शोषण करने के लिए ही विश्व भर में बड़े-बड़े धर्मस्थल खड़े कर रखे हैं। और हजारों साल से भोली-भाली जनता के अज्ञान और डर का नाजायज फायदा उठा कर उनका शोषण कर रहे हैं।

जब हजारों लोग मुंबई से शिर्डी तक नंगे पैर पैदल चल कर साईं बाबा से अच्छी बीवी, अच्छी नौकरी, अच्छी संतान और धंधे में मुनाफा मांगते हैं, वो समझते हैं कि साईं बाबा उनकी मुराद पूरी कर देगा। यदि साईं बाबा, बालाजी, वैष्णो देवी, अजमेर शरीफ या फिर मक्का व वेटिकन सिटी अपने भक्तों की ऐसी छोटी-मोटी मांगे और मुरादे पूरी करते हैं, और मानव जाति का हमेशा हित और सुख देखते हैं, तो फिर आज सारे के सारे छुपकर क्यों बैठे हैं? अब कोरोना में ज्यादा ताकत है या फिर Eeshvar, Allaah या God में? आप लोग मिलकर ये फैसला कर लो।

Eeshvar ही असत्य है!

वैज्ञानिक अध्ययन हमें बताता है कि 14 बिलियन साल पहले बिगबैंग के माध्यम से इस विश्व का निर्माण हुआ था।
और लगभग 5 बिलियन साल पहले पृथ्वी का निर्माण हुआ था।
इस पृथ्वी पर आज तक विज्ञान शोधार्थियों ने लगभग 18 मिलियन प्रजातियों को पहचाना है,
होमो सेपियन्स (मानव प्रजाति) 18 मिलियन प्रजातियों में से एक प्रजाति है।
और इस विश्व के अनगिनत साल के इतिहास में वर्तमान मानव जाति का कहीं कोई अता-पता नहीं था,
वर्तमान मानव जाति मुश्किल से पिछले 4 मिलियन साल से इस पृथ्वी पर रह रही है।
आज तक कई प्रजातियां पृथ्वी पर आई, कुछ साल तक रही और जलवायु बदलते ही नष्ट हो गई।
जिस तरह डायनासोर व अन्य कितनी प्रजातियां विलुप्त हो गई मानव जाति भी इस पृथ्वी पर हमेशा रहेगी
इसका कोई भरोसा नहीं है। क्योंकि इंसान भी इनमें से एक मामूली प्रजाति भर है।

विश्व को चलाने वाली एक शक्ति है जिसे विज्ञान, प्रकृति कहता है।
विज्ञान यह बताता है कि प्रकृति निश्चित नियमों के अनुसार खुद चलती है।
यदि प्रकृति पर काबू पाना है तो हमारे पास सिर्फ एक रास्ता है
और वह है प्राकृतिक नियमों के रहस्यों को अनुसंधान व प्रयोग के द्वारा जान लेना।
विज्ञान ने प्रकृति के बहुत सारे नियमों को जान लिया है, लेकिन अब भी विज्ञान की खोज निरंतर जारी है।

पूजा-पाठ करने से प्रकृति अपने नियम कभी नहीं बदलती

दुनिया के सारे धर्म हमको सिर्फ प्रकृति की पूजा करने की शिक्षा देते हुए यह कहते हैं
कि पूजा करने से प्रकृति प्रसन्न होती है और हमारी मांगे व मुरादें पूरी करती है।
दुनिया के तथाकथित धर्मों की यह मूलभूत शिक्षा ही सरासर झूठ है।
विज्ञान ने इस बात को साबित किया है, कि पूजा-पाठ करने भर से प्रकृति अपने नियम कभी नहीं बदलती।

यदि प्रकृति पर काबू पाना है तो उसका एकमात्र रास्ता है प्रकृति के नियमों को जानना।
आज तक दुनिया में मानव जाति के सामने जितनी भी समस्याएं आई,
जैसे कि प्राकृतिक आपदाएं, या कई प्रकार की संसर्गजन्य बीमारियां।
किसी भी धर्म ने या धर्म गुरु ने या फिर ईश्वर ने
इनमें से एक भी बीमारियों का कोई इलाज मानव जाति को नहीं दिया है।

यह तो सिर्फ विज्ञान है जिसने, मलेरिया, इनफ्लुएंजा, कॉलरा, स्मॉल पॉक्स
जैसी तमाम बीमारियों की दवाइयां ख़ोज कर इन महामारियों को हमेशा के लिए दुनिया से मिटा दिया है।
कोरोना का इलाज भी बहुत जल्द विज्ञान ढूंढ लेगा।

मानव जाति के ऊपर जब भी कोई बड़ा संकट आता है
तो सारे मानव अपने-अपने तीर्थ स्थल पर जाकर Eeshvar, Allaah या God के सामने झुक जाते हैं,
लेकिन कोरोना वायरस ने तो यह रास्ता भी बंद कर दिया है।
अब हमारे सामने एक ही रास्ता है और वह है विज्ञान का।

आज़ सारे भगवान (Bhagavaan) छुप कर बैठे हैं और हमारे सामने सिर्फ एक रास्ता है
और वह है हॉस्पिटल का। यह रास्ता हमें भगवान (Bhagavaan) ने नहीं विज्ञान ने दिया है।
किसलिए कोरोना वायरस से कुछ सीख लें।
विज्ञान वादी बनो और जाति धर्म के सांचे से बाहर निकल कर
एक नजर से हर इंसान और प्रकृति से प्रेम करना सीखो।

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