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सोमवार, मई 17, 2021

Energy | ब्रह्मांड में कितनी ऊर्जा है?

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6 अगस्त, 1945, को विश्व ने पहली परमाणु विस्फ़ोट त्रासदी का साक्षात्कार किया था। इसी दिन अमेरिका द्वारा जापान पर गिराए गए Little Boy नामक परमाणु हथियार में 64 किलो यूरेनियम का इस्तेमाल किया गया था। इस 64 किलो का महज 900 ग्राम हिस्सा ही बम की प्रक्रिया में इस्तेमाल हो सका था और उस 900 ग्राम में भी… महज 0.7 ग्राम यूरेनियम ही पूरी तरह विशुद्ध Energy में तब्दील हो पाया था। इस तरह, देखा जाए तो, लिटिल बॉय बेहद फिसड्डी बम था। फिर भी, महज 0.7 ग्राम यूरेनियम से, एक कागज के नोट से भी हल्की सामग्री का विस्फोट एक झटके में सवा लाख लोगों के लिए काल का पर्याय बन गया।

पदार्थ और Energy एक ही चीज़ हैं

आइंस्टीन ने हमें बताया था कि पदार्थ और ऊर्जा एक ही चीज़ हैं। पदार्थ को Energy और Energy को पदार्थ में तब्दील किया जा सकता है। अगर आप एक स्वस्थ वयस्क मनुष्य हैं और आपके शरीर को 100% एफिशिएंसी के परमाणु बम में तब्दील कर दिया जाए तो आप अकेले ही वुहान, इस्लामाबाद, लाहौर जैसे 30 बड़े शहरों को मिट्टी में मिला सकते हैं। देखा जाए तो संसार का प्रत्येक कण खुद में ही एक छोटा-मोटा Energy पावर हाउस है। और ब्रह्मांड में 10^80 इलेक्ट्रान-प्रोटान जैसे मूलभूत कण… जी हाँ… 10 के आगे 80 बार शून्य…!!

इस तरह अक्सर यह जिज्ञासा उठती है कि ब्रह्मांड में टोटल कितनी Energy होगी? शायद बहुत, बहुत ज्यादा? लेकिन जवाब जान कर आपको आश्चर्य और मायूसी दोनों होगी।

अब Energy का सच भी जान लीजिये

सच तो यह है कि… ब्रह्मांड में कोई Energy है ही नहीं… ब्रह्मांड में Energy की मात्रा शून्य है।

मैटर पार्टिकल्स, एन्टीमैटर तथा प्रकाश कणों में निहित ऊर्जा Positive होती है, वहीं यह Positive ऊर्जा अपने चारों ओर ग्रेविटी की शक्ति से निर्मित एक ऐसा “कुआं” (Gravity well) निर्मित करती है जो “नेगेटिव एनर्जी” से बना होता है। पृथ्वी समेत आकाशीय पिंड नेगेटिव एनर्जी के इसी गड्ढे में फंसे हुए सूर्य की परिक्रमा करने पर बाध्य हैं। इस ब्रह्मांड में जितनी पॉजिटिव एनर्जी है, ठीक उतनी ही, बिना किसी अंतर के, उसी मात्रा में ग्रेविटेशनल ऊर्जा के रूप में निगेटिव एनर्जी भी मौजूद है। ब्रह्मांड का अस्तित्व इस पॉजिटिव-निगेटिव एनर्जी की कशमकश पर टिका हुआ है। पॉजिटिव और निगेटिव एक-दूसरे को कैंसिल आउट करते हैं। इन्हे मिलाइये, और उत्पन्न परिणाम शून्य होगा।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं

इसे बेहतर समझने के लिए एक मैदान की कल्पना कीजिये। आप मैदान से मिट्टी निकालते जाइए और मिट्टी के इस्तेमाल से एक गगनचुंबी इमारत बनाते जाइए… जितनी ऊंची इमारत होगी, गड्ढा भी उतना ही गहरा होता जाएगा। इमारत को तोड़ कर मिट्टी गड्ढे में भर दीजिये, Positive Energy यानी इमारत गायब, Negative energy यानी गड्ढा भी गायब… शेष रह जाएगा सपाट मैदान यानी शून्य…!

यह कुछ ऐसा ही है मानों आप जीरो बैलेंस के साथ क्रेडिट कार्ड के सहारे शॉपिंग कर रहे हैं। जितना सामान खरीदेंगे, उतना ही बैलेंस नेगेटिव होगा। सामान बेच के लोन भर दीजिये, बैलेंस फिर से शून्य हो जाएगा।

तो, तात्पर्य यह है कि ब्रह्मांड में प्रत्येक Positive energy अपने चारों ओर Negative energy का आवरण निर्मित करती है।
ब्रह्मांड का अस्तित्व इसी रस्साकशी पर टिका है।
Positive का अस्तित्व Negative पर आधारित है।
Positive-Negative को मिला दीजिये… अस्तित्व का भ्रम टूट जाएगा… रह जायेगा सिर्फ़ शून्य।

तो मित्रों, देखा जाए तो ब्रह्मांड को बनाने के लिए तकनीकी तौर पर कोई ऊर्जा कभी खर्च ही नहीं हुई।
यहां तो सब कुछ शून्य है !!!

~विजय राज शर्मा

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