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सोमवार, मई 17, 2021

Ishwar Hai Ya Nahin? सबसे बड़ा प्रश्न क्यों है?

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Ishwar है या नहीं? ईश्वर के ना तो, होने का सबूत है, ना ही उनके नहीं होने का ही सबूत है। वो होते हुए भी, नहीं हैं। वो नहीं होते हुए भी है। होना, ना होना हम मनुष्यों के अनुभवों से तय हुई स्थिति है। हमारा कोई अनुभव ईश्वर पर लागू नहीं होता। हम अपने अनुभवों से ईश्वर को कभी नहीं समझ सकते हैं। वो हमारी बुद्धि से परे है।

Ishwar hai ya nahin..?

Ishwar

ये हम कभी जान नहीं सकेंगे कि ये ना तो हमारी जरूरत है और ना ही हैसियत।

जिसको भी हम ‘होना’ कहते हैं, वो दरअसल अस्तित्व का भ्रम है। और जिसको भी हम नहीं होना समझते हैं, वो दरअसल अस्तित्व की अवहेलना है।

हमारे पूर्वज अब नहीं हैं… (अनुभव यही कहता है।) पर ये सच है क्या?

हमारे पूर्वज हमारी धमनियों में हैं। अपने गुणसूत्रों (DNA) के जरिए उनके जीवन का टुकड़ा, बीज… हमारे भीतर पनप कर फल-फूल रहा है। हमारे पूर्वज हमारे रूप में हमारे साथ हैं। उनका जीवन, हमारे बच्चों में हमसे होता आगे बढ़ेगा। हमारी आदतें, हाव-भाव, चेहरा-मोहरा सारा कुछ, हमारे पूर्वजों जैसा इसीलिए तो है कि हमारे पूर्वज हमारे भीतर ही जीवित है।

क्या हमें अनुभव होता है कि पूर्वज नहीं है?

लेकिन गौर करने पर हम पाते हैं कि वो फैल गए हैं… हमारे भाई-बहनों में, हमारे बच्चों में। और इस तरह वो अब पहले से ज्यादा ही हैं इस दुनिया में। हम खुद के बारे में विचार करते हैं कि हम हैं। लेकिन हम खुद कभी भी हम नहीं। हम तो अपने पूर्वजों की प्रतिलिपि हैं… उनकी कॉपी। हम कभी भी हम हैं ही नहीं। ये अपने आप में बिल्कुल अजीब है कि नहीं?

Kya Ishwar Apne Saath Hai?

आप जितना भी Ishwar के होने के सबूत खोजेंगे, आपको उतना ही उनके नहीं होने का प्रमाण मिलेगा। आप जितना ही Ishwar के नहीं होने के प्रमाण खोजेंगे, आपको उतना ही उनके होने के सबूत मिलेंगे।

ईमानदारी से कोशिश करें तो हर सवाल का सच जवाब, यहां उल्टा मिलेगा। अब आप खुद तय कीजिए की वो है कि नहीं। जैसी आपकी खोज, ईमानदारी, उत्कंठा, अभिलाषा, इच्छा वैसा आपका अनुभव और वैसा ही आपको मिला उत्तर भी।

यहां कुछ भी आपके अनुभव से बाहर नहीं है। आप वहीं समझ और समझा सकते हैं जिसका आपको अनुभव है। लेकिन मनुष्य का अतीत कोई इतना भी विशाल नहीं कि वो ब्रह्मांड का सब कुछ अनुभव कर चुका हो। संसार में जो कुछ भी मौजूद है मनुष्य उसका बस महाशंखवे के भी महाशंखवे के महाशंखवा हिस्से से भी बेहद कम अनुभव कर सका है। तो बाकी जो अभी अनुभव किया जाना ही है उसके अनुभव के बिना कोई निर्णय कैसे मुमकिन है।

ईश्वर की ख़ोज

हां, सुरक्षित जीवन जीने के लिए किसी शक्तिशाली पर भरोसा जरूरी है। तो हमने Ishwar खोज लिया, कि वो हमारी देख-भाल कर रहा है। संसार का निर्माता है। मालिक है। ये विश्वास हमको जीने में आसानी और सहज, सुलभ सहूलियत देता है। तो इस तरह Ishwar है।

लेकिन Ishwar का काम, हमारी देखभाल करना नहीं। वर्ना वो, तीन महीने के बच्चे को बेहिसाब तकलीफ़ नहीं देता। जीवन के दूसरे रूपों को इतनी प्रताड़ना और तकलीफ़ नहीं देता। कहीं नफरत और कहीं घृणा नहीं भरता। तो Ishwar हमारे लिए नहीं है। वो निरपेक्ष, उदासीन है। जिसे दुनिया से विरक्ति है। हमसे उसको कोई लेना-देना नहीं है।

हम जिस Ishwar पर विचार करते हैं, वो हमारे विचार की ही उपज है। विचार खत्म, हमारा Ishwar भी खत्म। तो Ishwar है क्योंकि कि हम चाहते हैं, मानते हैं कि वो हो। Ishwar नहीं है, हमको वो नहीं मिलता है कि हम ऐसा नहीं मानते हैं कि वो है।

किसी जिंदा आदमी के लिए Ishwar है। लेकिन उसके मरने के बाद उसका Ishwar कहां है? वो क्यों नहीं बता सकता कि Ishwar है, कि नहीं? क्योंकि Ishwar उस व्यक्ति के दिमाग से ही अस्तित्व में है। उसका दिमाग मर गया तो उसके लिए उसका Ishwar खत्म हो गया, ग़ायब हो गया।

~आनंद के. कृष्ण

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