12.7 C
Innichen
बुधवार, जुलाई 28, 2021

Avengers Series | इस्लाम एवेंजर सीरीज जैसा है!

Must read

Islam बिल्कुल Avengers Series की तरह है, इसकी मूल शिक्षा इसी Series के जैसी है, जहाँ ये तो बता दिया गया कि अब गुड्डे-गुड़िया से न खेलो मगर फिर उन्हीं गुड्डे-गुड़ियों को आसमान में शिफ्ट कर दिया गया और वहां से उन्हें आपकी रक्षा करने वाला बताया गया। सारे छोटे-छोटे चरित्र को हटा कर बस एक Avengers Series के Thanos पर विश्वास करने को बोला गया, क्योंकि उसी के पास सारी मणि और सारी शक्तियां हैं।

Islam की अवधारणा Avengers Series में दिखती है।

इस बात को इतनी ताक़त और इतनी जोर-ज़बरदस्ती से बोला गया कि जिसने इस पर यकीन कर लिया उसके सामने और कुछ जानने और खोजने की सारी संभावनाएँ ख़त्म कर दी गयीं… और ऐसा राजनीतिक कारणों से हुआ… अगर ये होता कि Prophet आगे भी आते रहेंगे तो Islam बहुत आगे निकल चुका होता… ये आज का सबसे मॉडर्न धर्म होता… मगर ये कह कर कि ये किताब आख़िरी है और ये Prophet आख़िरी इसमें सारी संभावनाएं ख़त्म कर दी गयीं… इसलिए वहां चौदह सौ साल से कोई आध्यात्मिक विकास नहीं हुआ और न आगे होगा… ये मामला Thanos से आगे कभी नहीं बढ़ पायेगा क्योंकि मणि की सारी शक्तियां तो वही लिए बैठा है।

छोटे बच्चे अपने भगवान किन चीजों में ढूंढते हैं?

बच्चे जब छोटे होते हैं तब वो गुड्डे-गुड़ियों और खिलौनों से खेलते हैं… वो गुड्डे-गुड़िया अपने पास में रख के सोना पसंद करते हैं, वो उस से बातें करते हैं और उसे अपना दोस्त व रक्षक समझते हैं… उन्हें जब भी डर लगता है तब वो अपने खिलौने को सीने से चिपका के सो जाते हैं… बच्चों को ये लगता है कि उनकी गुड़िया सच-मुच इस दुनिया में है तभी वो उनको सुरक्षा दे रही है… बच्चों को अगर आप ये कहें कि तुम डरो नहीं, दूर आसमान में बैठा कोई अदृश्य शक्ति या व्यक्ति तुम्हारी रक्षा कर रहा है तो वो ये बात बिल्कुल भी समझ नहीं पायेंगे… उन्हें तो सब कुछ अपने बहुत करीब चाहिए होता है… एक गुड़िया चाहिए जिसे वो छू सकें… जिस से वो बात कर सकें।

बड़े बच्चे अपने भगवान किन में खोजते हैं?

यही बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो Avengers Series देखने लगते हैं, उन्हें अब Iron Man और Thanos अपने हीरो लगते है जबकि वो इस धरती के नहीं है वो तो सुदूर किसी दूसरे ग्रह के है। अब बड़े बच्चों से अगर आप ये कहें कि Iron Man या Thanos यहीं है तो वो इसे मानेंगे नहीं।

वो सुदूर ग्रह या भविष्य में कहीं होंगे तो वो ये बात झट से मान लेंगे क्योंकि वे अब बड़े हो चुके हैं अब उनकी समझ थोड़ी सी बढ़ चुकी है अब वे अपनी गुड़िया सीने से चिपका के नहीं सोते हैं और न अब खुद को उस के साथ सुरक्षित महसूस करते हैं इन्हें गुड़िया तो चाहिए होती है मगर ऐसी जिसे छू कर सत्यापित न कर सकें क्योंकि छू लेंगे या देख लेंगे तो जान जायेंगे कि वो बस एक मिट्टी या प्लास्टिक का खिलौना है और कुछ नहीं इसलिए इन्हें अब सुदूर ग्रह का कुछ चाहिए होता है।

हिन्दू धर्म में एक पूरी Series है!

इसके विपरीत, हिन्दू धर्म की शिक्षा गुड्डे-गुड़ियों से शुरू होती है। पूरा खेल आपके सामने होता है, अपने भगवान को सजाओ, संवारो, उसकी पूजा करो, उसके साथ उत्सव मनाओ। जैसे चाहो नाचो-गाओ और धर्म को एंजॉय करो फिर इसी धर्म में आगे निराकार चैप्टर भी आता है और आगे अगर बढ़कर खोजने की लालसा है तो “भगवान” से इन्कार का चैप्टर भी इस धर्म में मिल जाएगा और पूर्ण नास्तिकता का चैप्टर भी आगे मिलेगा… फिर अपने भीतर उतरने का चैप्टर भी इसी में मिलेगा और “अहम् ब्रहास्मि” का चैप्टर भी… एक पूरी Series इस धर्म में है… अब जैसी आपको देखने और खोज करने की लालसा हो आप उस स्तर में रहिये और अपने हिसाब से खोजते रहिये।

लेकिन ज़्यादातर हिन्दू मन First Series से आगे नहीं निकल पाता है, क्योंकि कर्मकांड करने में न आत्मा से हर्रा लगता है और न फिटकरी चार लाउडस्पीकर लगाओ भजन बजा दो आरती हो गयी हो गया। जगराता आप भी ख़ुश, आपका ईष्ट देवता भी ख़ुश इस से आगे भी जो बहुत ज्यादा चले जाते हैं वो अपना एक गुरु बना लेते हैं और सोचते हैं कि गुरु अब वैतरणी पार करवा देगा बस अपने ऊपर कोई कष्ट नहीं लेना न चिंतन करना और न मनन ध्यान रखिएगा मैं हिन्दू धर्म के विरोध में नहीं हूँ मगर आध्यात्म अब इसमें जिस लेवल पर आ चुका है, उसे सुधारना बहुत मुश्किल है इस धर्म का अब कर्मकांड ही मूल रह गया है और उसी कर्मकांड से आज की राजनीति भी उपज चुकी है। इसलिए अब इसमें सुधार लगभग नामुमकिन है।

हिन्दू धर्म से अब अध्यात्म समाप्त हो चुका है!

जैसे Islam में Aakhiri Rasool -Antim Gyaan बना के सारी संभावनाएं बंद कर दी गयी हैं
वैसे ही हिन्दू धर्म में अब राजनीति सम्मिलित हो जाने से रही-सही सम्भावनाएं लगभग ख़त्म हो चुकी है
भीड़ इस धर्म में अब आध्यात्म नहीं जान पाएगी, वैसे ही जैसे वो Islam में नहीं जान पाती है।

मगर विज्ञान के द्वारा मानव चेतना अब इस स्तर पर आ चुकी है
कि जहाँ आपको गुड्डे-गुड़ियों और Thanos के खेल की ज़रूरत नहीं बची है
अब हमको और आपको पता है कि चाँद मिट्टी व पत्थर का एक बड़ा सा टुकड़ा है
हम जानते हैं कि चाँद दो भागों में कभी नहीं टूटा था !
हम जानते हैं कि पृथ्वी गोल है
हमें पता है कि सूरज कीचड़ में नहीं डूबता।
हम जानते हैं कि मंगल पर कोई नहीं बैठा है… वो आज वीरान है…
हम जानते हैं कि पृथ्वी निर्वात में लटकी हुई है और किसी सूकर की सींघ पर नहीं टिकी है।

तो हम अब,
जब ये सब जान गए हैं तो फिर उन लोगों की अन्य जानकारियों का क्यों समर्थन करना है,
जो हमें ये सब भ्रम समझा कर गए थे?
उन लोगों की समझ का अंदाजा आप इन्हीं बातों के विज्ञान द्वारा सत्यापित होने के बाद लगा सकते हैं,
तो अब उस समझ को आगे क्यों ढोना चाहिए?

बुद्ध को जानिए और समझिए!

इसलिए अगर धर्म और आध्यात्म की लालसा को लेकर मुझ से कोई सवाल करता है या मेरी राय पूछता है तो मैं सीधा Buddh को समझने की सलाह देता हूँ। मैं कहता हूँ कि अगर धर्म का कीड़ा आपके भीतर कुलबुला रहा है तो Buddh को समझिये और उनकी बातों को फॉलो कीजिये। क्योंकि Buddh गुड्डे-गुड़ियों और आकाश में बैठे Thanos से आगे बढ़कर बात करते हैं… वो इन सबका पूर्ण इन्कार करते हैं और नास्तिकता में ले जा कर आपको स्वयं में झाँकने पर मजबूर करते हैं। वो आपको ये सुविधा नहीं देते हैं कि आप एक बिल्डिंग का चक्कर लगा कर Thanos को ख़ुश कर लो और स्वर्ग पा जाओ, और न वो ये सुविधा देते हैं कि आप पूरी रात जगराता कर के अपने ईष्ट को ख़ुश कर लो Buddh आपको सब कुछ स्वयं करने को कहते हैं।

मगर बेहोश और आलसी लोगों को Thanos और Avengers Series में ही मज़ा आता है
वो इस धर्म के नशे में डूबे रहना चाहते हैं।

~ताबिश सिद्धार्थ

- Advertisement -

More articles

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

- Advertisement -

Latest article