James Randi | तर्कशीलता को समर्पित एक जीवन

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(विश्वप्रसिद्ध तर्कशील योद्धा जेम्स रैंडी के निधन पर विशेष)

James Randi का जन्म 7 अगस्त 1928 को टोरंटो, कनाडा में हुआ था। बचपन से ही वे असाधारण रूप से प्रतिभाशाली थे। हालांकि वे कॉलेज शिक्षा प्राप्त न कर सके परन्तु जादू को जानने समझने में उनकी दिलचस्पी हमेशा रही। उन्होंने इस कला को सीखने व इसमें महारत हासिल करने में बेहद मेहनत की और वह समय भी आया जब अपने कौशल से दुनिया भर में प्रसिद्धि प्राप्त की। उन्होंने यूरोप और एशिया में बहुत से प्रदर्शन किए। राष्ट्रीय टेलीविजन कार्यक्रमों और कॉलेज परिसरों में ‘अद्भुत जेम्स रैंडी’ के रूप में ख्याती अर्जित की।

विगत समय में उन्होंने आधी शताब्दी तक जादूगरों की दुनिया में अपनी कला के साथ ही उन पर भी नजर रखी जो मैजिक के माध्यम से जनता को गुमराह करते थे, जो अलौकिक शक्ति होने के दावे करते थे। चमत्कारों के रूप में स्वयं को सिद्ध पुरुष कहते थे। वे उन का पर्दाफाश भी करते थे, ये ही भावना उन्हें महान जादूगर के साथ ही एक तार्किक वैज्ञानिक चिंतनशील व्यक्ति के रूप में दुनिया भर में लोकप्रिय बनाती थी।

जेम्स रैंडी संदेहवादी व तर्कशील थे

James Randi ने सदा Rational तरीके से सभी चीजों को देखने की कोशिश की। वे चमत्कारों के माध्यम से धोखाधड़ी करके अपने को स्थापित करने वालों के खिलाफ सदा खड़े रहे। उन्हें मालूम था कि ऐसे तत्व समाज मे बहुत मजबूत हैं जो मानवता के नाम पर वैज्ञानिक चिंतन को कमजोर करते हैं। वे आध्यात्मिकता की आड़ में काम करते ज्योतिषियों, भाग्यशास्त्री और छद्म विज्ञान का सहारा लेकर जनता को भ्रमित करने वालों के लिए निर्विवाद रूप में बड़ी चुनौती रहे। वे सार्वजनिक जीवन मे सदा विज्ञान के पक्ष में खड़े रहे।

संयुक्त राज्य अमेरिका में पत्रकार रिचर्ड पायत ने 29 अगस्त 1986 को James Randi से साक्षात्कार किया जिसमें उन्होंने कहा: जब मैं 15 साल की उम्र में था, तो मैंने पहले ही शौकिया जादूगर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी।

तब मैंने टोरंटो में आध्यात्मिक-प्रार्थना में चर्च में भाग लिया, तो मैंने देखा कि वे उसी चीज की नकल का कर रहे थे, जो हैरी हुडनी (1874-1926) करता रहा। उन्होंने मंच जादूगर के रूप में लोगो को मनोवैज्ञानिक तरीके से मानसिक गुलामी की तरफ धकेलने पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने अपने चमत्कारों के दावेदारों को परख के पश्चात प्रदर्शन करने पर दस हजार डॉलर के पुरस्कार देने की घोषणा की थी। और यूरी गेलर नामक जादूगर के दावे को चुनौती दी, साथ ही दावा किया कि यूरी गेलर की धातु-झुकाने की ट्रिक असाधारण नहीं है: द मैजिक ऑफ यूरी गेलर (1975) में उन्होंने इस कथित चमत्कार का पर्दाफाश किया था। अपने सबसे सफल पर्दाफाशों में से उनका एक ईसाई चिकित्सक का पर्दाफ़ाश करना भी था।

भ्रमितों के लिए लिखी कई किताबें

1986 में उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में पीटर पाप ऑफ के दावों को चुनौती दी जो बीमारियों से पीड़ित लोगों के उपचार में, पीड़ितों को नाम से बुला कर उन्हें ठीक करने का दावा करता था। वह कहता था कि ये शक्ति उन्हें सीधे ईश्वर से मिलती है। असल में उन्होंने एक ट्रिक के माध्यम से यह विकसित किया था। जेम्स रैंडी ने इसका खुलासा किया। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी ‘नास्त्रेदमस’ का भी एक पुस्तक के माध्यम से पर्दाफाश किया। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों का पर्दाफाश, परियों की फोटोग्राफी, उड़न तश्तरियों का भ्रम या बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य सहित दुनिया के बड़े पाखंडों का उल्लेख जेम्स रैंडी ने अपनी पुस्तक द मिस्ट्री ऑफ मिरेस्ट्रीस में किया है।

हम में से ज्यादातर ने जादूगरों को हाथ की सफाई से चम्मच को मोड़ते देखा होगा। इस पाखंड का पर्दाफाश भी जेम्स रैंडी ने किया था। उन्होंने बिना सर्जरी के पथरी निकालने के पाखण्ड को भी उजागर किया। उन्होंने होम्योपैथी को भी अवैज्ञानिक माना था।

भारतीय साथियों को समर्पित की अपनी किताब

James Randi ने अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लगातार जारी रखी। अंग्रेजी में उनकी एक प्रसिद्ध पुस्तक ‘फिल्म फ्लेम’ जिसे- चमत्कारों का रहस्य– शीर्षक के तहत प्रकाशित किया गया था। इस पुस्तक का पंजाबी संस्करण रैंडी ने अपने तर्कशील साथियों डॉक्टर अब्राहम टी. कोंबूर, बी. प्रेमानंद, मेघ राज मित्र, डाक्टर नरेंद्र दाभोलकर विजयम, सनल एडामाडु जैसे प्रसिद्ध तर्कशीलों के नाम समर्पित किया। 20 अक्टूबर 2020 को तर्कशील आंदोलन के इस योद्धा ने अंतिम सांस ली। उनके चले जाने से तर्कशील आंदोलन को बहुत हानि पहुंची है। इस लिए ऐसे महान वैज्ञानिक चिंतक के निधन पर दुःख व्यक्त करते हुए उनके अधूरे कार्यो को लगातार जारी रखने के लिए हम सब प्रतिबद्ध है।

~गुरमीत सिंह, (अंबाला)


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