Kasam Khuda Ki Tum Nahin Sudharoge

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आज़ वर्तमान शासन में मुसलमान खुद को असुरक्षित क्यों महसूस कर रहा है? अब क्या अल्लाह पर से उसका भरोसा उठ गया है? क्योंकि हमें मालूम है कि Kasam Khuda Ki Tum Nahin Sudharoge.

भाई, तुम अल्लाह पर बिल्कुल भरोसा क़ायम रखो फिर चाहे कोई तुम्हारी बोटियां नोच डाले पर तुम अपने यक़ीन पर बिल्कुल कायम रहना। अरे, देखो तो कहीं नमाज क़ज़ा न हो जाये…

यक़ीन रखो, जन्नत तुम्हें ही मिलेगी

ये तुम्हारे साथ जो भी करें लेकिन तुम अपने यक़ीन पर कायम रहना, अरे, इसका बदला तो तुम्हे आख़िरत में मिलेगा इस बात पर गुमान भी रखो, क्योंकि तुम मुसलमान हो, उम्मती हो, जन्नत तुम्हें ही मिलेगी किसी ऐरे-गैरे काफ़िर को नहीं।

आखिर इसी जन्नत के लिए तो तुमने अपने बच्चों को मदरसी कीड़े बना डाला है। भाई, दिनी तालीम भी तो कोई चीज़ होती है और जरुरी भी है आख़िरत के लिए, है न..!

अब दुनिया में चाहे वह ठेला खींचे, कबाब बेचे, पंचर बनाये, बाल काटे या कपड़े सिले लेकिन दीन पर कायम रहे। वही दीन जिसके लिए तुम सुनते आए हो कि पिटते रहना, मरते रहना लेकिन उस पर कायम रहना। क्योंकि हमें मालूम है कि Kasam Khuda Ki Tum Nahin Sudharoge…

तुम्हारे समाज में कोई डॉक्टर हो न हो लेकिन मुल्ला जरूर होना चाहिए, वही मुल्ला जिसको तुम्हारी लड़कियों के स्कूल जाने से नफ़रत है। तुम्हारे आसपास कोई स्कूल हो न हो लेकिन मदरसा जरूर होना चाहिए जहाँ से तुम्हारी आने वाली पुश्ते दीनी तालीम के नाम पर बर्बाद होती रहें।

तुम्हें अपना आख़िरत सुधारना है, तो भरोसा कायम रखो

घर में भूजि भांग न हो फिर भी जमात के नाम पर चालीस दिन काम धंधा छोड़ कर
इस्लाम फ़ैलाने के लिए चिल्लाया करो ठेला खींचने, पंचर लगाने, गोश्त बेचने से थोड़ा बहुत बचा सको
तो उसे बच्चों की तालीम में खर्च करने की बजाये हज़ करो, उर्स में खर्च करो
या किसी मरे हुए पीर औलिया की दरगाह पर लुटा आओ क्योंकि दुनिया बने न बने आख़िरत तो सुधर ही जायेगा, क्यों?
हमें मालूम है कि Kasam Khuda Ki Tum Nahin Sudharoge…

तुम चाहे टूटी झोपड़ी में रहो लेकिन तुम्हारी मस्जिदें आलीशान होनी चाहिए
क्योंकि तुम्हें यकीन है कि मस्जिदें अल्लाह का घर होती है और जब इन्हे तोड़ा जाता है
तब तुम्हारा वही रब्बुल कायनात अपने ही घर की हिफाज़त नहीं कर पाता
और उस अल्लाह के घर की चाकरी में तुम्हें शहादत मिल जाती है!
क्योंकि हमें मालूम है कि Kasam Khuda Ki Tum Nahin Sudharoge…

एक अल्लाह को मानने वाले तुम मुसलमान खुद सैकड़ों फिरकों में तकसीम रहो,
बंटे रहो एक दूसरे को नीचा दिखाने की कसरतों में मशगूल रहो
देवबंदी, बरेलवी, अहमदी, शिया, सुन्नी इन्ही में अपने मज़हब का सामूहिक बलात्कार करते रहो
और पिछड़ते चले जाओ और दोष दो हुकूमतों को जम्हूरियत को सियासत को
लेकिन खुद कभी अपने गिरेबाँ में मत झांकना !

तुम्हें तो ये सब पढ़ कर बुरा लग रहा होगा, क्यों?
अरे भाई मैं तो अब भी तुम्हें समझा रहा हूँ।
अब क्योंकि आईना देखना तो तुम्हें पसंद नहीं है न तो बुरा तो लगेगा ही।

~शकील प्रेम

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