Kashmiri Pandit | किताब: कश्मीर और कश्मीरी पंडित- अशोक कुमार पाण्डेय

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“आप कश्मीर का ‘क’ लिखिये तुरन्त कोई ‘प’ लेकर आ जायेगा। मानो कश्मीर में जितना कुछ हो रहा है, या होगा सब पंडितों के नाम पर जस्टिफाई किया जा सकता है”!

~अशोक कुमार पाण्डेय

Kashmir aur Kashmiri Pandit के बारे में

यह किताब Kashmir के उथल-पुथल भरे इतिहास में Kashmiri Pandit के लोकेशन की तलाश करते हुए उन सामाजिक-राजनैतिक प्रक्रियाओं की विवेचना करती है जो Kashmir में इस्लाम के उदय, धर्मान्तरण और Kashmiri Pandit की मानसिक-सामाजिक निर्मिति तथा वहाँ के मुसलमानों और पंडितों के बीच के जटिल रिश्तों में परिणत हुईं। साथ ही, यह किताब आज़ादी की लड़ाई के दौरान विकसित हुए उन अन्‍तर्विरोधों की भी पहचान करती है जिनसे आज़ाद भारत में कश्मीर, जम्मू और शेष भारत के बीच बने तनावपूर्ण सम्बन्धों और इस रूप से कश्मीर घाटी के भीतर पंडित-मुस्लिम सम्बन्धों ने आकार लिया। नब्बे के दशक में पंडितों के विस्थापन के लिए ज़िम्मेदार परिस्थितियों की विस्तार से विवेचना करते हुए यह किताब विस्थापित पंडितों के साथ ही उन Kashmiri Pandit से संवाद स्थापित करती है जिन्होंने कभी कश्मीर नहीं छोड़ा, और उनके वर्तमान और भविष्य के आईने में कश्मीर को समझने की कोशिश करती है।

‘कश्मीरनामा’ के लेखक ने इसे भी लिखा है!

Kashmiri Pandit के लेखक वही अशोक कुमार पाण्डेय जी हैं जो ‘कश्मीरनामा’ के भी लेखक है। वो किताब जो बुद्धिजीवियों और आम पाठकों दोनों वर्ग में समान रूप से सराही गई, और बेस्ट सेलर किताबों में पहला नम्बर पा चुकी है। ‘कश्मीर और कश्मीरी पंडित’ इनकी दूसरी किताब है।

भारत के पूर्वी उत्तर प्रदेश के मऊ ज़िले के सुग्गी चौरी गांव में 24 जनवरी, 1975 को जन्मे अशोक कुमार पाण्डेय जी कश्मीर के इतिहास और उस काल पर विशेषज्ञता हासिल कर अपनी ख़ास पहचान बना चुके हैं। शैक्षिक योग्यता गोरखपुर विश्वविद्यालय से पूरी करने के उपरांत अशोक जी अब कविता, कहानी और अन्य कई विधाओं में लेखन के साथ अनुवाद कार्य भी कर रहे हैं।

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