Kaun sa dharm? Kaun hai ishwar? aur Kaise Karma?

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कौन सा धर्म?

धर्म..!! Kaun sa dharm? आप ने जो कुछ अपनी योग्यता और मेहनत से हासिल नहीं किया वो आपका नहीं हो सकता। धर्म खुद ऐसी चीजों को हराम कहता है। फिर धर्म या जाति जो आपने अपनी मेहनत या योग्यता से हासिल नहीं किया वो आपका कैसे? ऐसा Kaun sa dharm है, जो खुद को श्रेष्ठ नहीं कहता? जबकि व्यक्ति खुद को श्रेष्ठ कहे तो अहंकारी हुआ… इस श्रेष्ठता के दावे से Kaun sa dharm है, जिसके अनुयायी हिंसा नहीं करते या अब नहीं कर रहे? कौन से धर्म में खुद के सतत विस्तार या हुकूमत की इच्छा नहीं? और अंततः Kaun sa dharm है, जिसका इस्तेमाल सत्ता, साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं हुआ? जो चीज़ इतनी आसानी से सत्ता और साम्राज्य के लिए इस्तेमाल हो जाये, आप उसे महान माने तो मानते रहे।

कौन है ईश्वर?

ईश्वर..!! Kaun hai ishwar? मैं अगर कमरे के एक कोने में खड़े होकर किसी से बात करने लगूं और कमरे में मेरे अलावा कोई न हो, तो आप मुझे पागल या मनोरोगी मानेंगे, आपकी प्रार्थना क्या है? आप टीवी तक देखभाल के खरीदते हैं, फिर ईश्वर चुन लेते हैं बिना किसी तर्क और जांच के? Kaun hai ishwar जो आपके किये कर्मों का बदला अगले जन्म या किसी काल्पनिक स्वर्ग/नरक में देने का वादा करता है! यानि कि पहले ही किसी के होने का कोई सुबूत नहीं, तिस पर इस दुनिया में उसकी कुछ भी ठीक करने की हैसियत नहीं। एक पोस्ट डेटेड चेक आपके हाथ में है, जिसके कैश होने की गारंटी आप लिए बैठे हैं। करोड़ों लोग मरते हैं, जिनमें अधिसंख्य बच्चे, मज़लूम, असहाय और गरीब हैं, आप इसे किसी दैवीय योजना का हिस्सा मान लेते हैं।

ये दैवीय योजना, कितने हज़ार साल से चल रही है? आपका ईश्वर बच्चों और कमजोरों को मार रहा है? अमीर और बेईमान ऐश कर रहे हैं। आज से नहीं, न जाने कब से, यहां तक कि ज़्यादातर अवतार और पैगम्बर भी या तो राजा के घर, या ऊंची जाति या फिर बड़े कबीलों में पैदा होते हैं। मज़े की बात उनमें कोई स्त्री नहीं होती…!

कौन सा कर्म?

कर्म..!! कैसे कर्म? आप परीक्षा आज दें और सरकार आपको पास होने पर नौकरी अगले जन्म या स्वर्ग में देने का वादा करे, तो तैयार हैं इसके लिए? आप अब इन्वेस्टमेंट तक शार्ट टर्म करते हैं, जिस में जल्दी रिटर्न्स हों और इस धोखे में आ जाते हैं। जो लोग आज गरीब हैं या दलित हैं, उनके पुरखों के कौन से बुरे कर्म थे कि वो आज न जाने कितनी पीढ़ियों से गरीब हैं… आप अमीर और बेईमान हैं तो आपकी कौन सी पीढ़ी गरीब होगी? आप पिछले जन्म में अगर कोई पशु थे तो कौन सा पाप आपने किया कि इस जन्म में आप दुख झेल रहे हैं? इस जन्म में अच्छे काम करने पर भी दोबारा मनुष्य नहीं बनने वाले तो क्या अगले जन्म में फिर पशु के तौर पर इसका कौन सा फायदा मिलेगा?

ये अच्छे और बुरे कर्म से उन अमीरों को फ़र्क़ क्यों नहीं पड़ता जो गरीबों को लूट रहे हैं और मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरुद्वारे उनके चंदे के पैसे से बन रहे हैं। जो ताकतवर हैं, कमजोरों को कुचलते हैं लेकिन धर्म उनको मंच पर बिठा कर सम्मानित कर रहा है।

दरअसल धर्म सिर्फ सत्ता का एक औज़ार है।
पूंजी का मुंह है धर्म, धर्म के पैर हैं – “जाति” और “Gender” इन पैरों को तोड़िये,
धर्म घुटनों पर आ जायेगा, फिर धर्म मर जाएगा और फिर बारी आएगी पूंजी के ख़िलाफ़ युद्ध की।

याद रखिये अगर दूसरे के धर्म का कट्टरपंथ बुरा है, तो आपके धर्म का अच्छा नहीं हो सकता…!!

धर्म को सत्ता का औज़ार मत बनने दें

ये सब लिखने से कुछ भी दिमाग खुला हो तो बस ये समझियेगा कि चुनाव आने वाले हैं,
दिल्ली में बैठा नेता- अभिनेता अब अपने पिछले वादे भुलाकर आपको, मंदिर और मस्जिद में उलझा रहा है।
उसके झांसे में मत आइयेगा।
अहम सवाल रोटी, शिक्षा, रोज़गार और स्वास्थ्य का है… उन पर अड़े रहिएगा…
धर्म को सत्ता का औज़ार मत बनने दीजिएगा… वरना पीढियां भुगतेंगी !!

~Mayank Saxena

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