Islamic fundamentalists सुनो

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कुछ Islamic fundamentalist कहते हैं कि इस्लाम में पुरुषों को अधिक शादियों की अनुमति है ताकि वे बाहर जाकर मुंह न मारें इसलिए कई पत्नियों की व्यवस्था है। इससे समाज एड्स जैसे रोग से सुरक्षित रहेगा।

तो मैं कहता हूँ कि “एक से अधिक पुरुषों की जरूरत तो आपकी पत्नी को भी हो सकती है तो उन्हें क्यों नहीं एक से अधिक पति रखने की अनुमति दी गयी? समाज को इस तरह से भी एड्स से सुरक्षित रखा जा सकता है”।

ये कहते हैं कि अमेरिका में सबसे अधिक यौन ज्यादतियाँ होती हैं। न जाने ये ऐसी खबरें कहां से खोद कर लाते है, उन्हें तो मालूम ही नहीं है कि Islamic मुल्कों में तो औरतें मर कर भी सुरक्षित नहीं रहती। वहाँ तो कब्रें खोद कर उनकी लाशों से बलात्कार करने का रिवाज आम है।

अरब संस्कृति को इस्लाम के नाम पर इन पर ठूंसने की प्रक्रिया तो बच्चे के जन्म के साथ ही शुरू हो जाती है। जब उसके कान में अज़ान दी जाती है। उसे तो ज़बरदस्ती मुसलमान बनाने की प्रक्रिया तो उसी समय से शुरू हो जाती है। खाना कैसे खाना है, पानी पीने के लिए गिलास किस हाथ से पकड़ना है, कपड़े कैसे पहनने हैं, चलना कैसे है, बैठना कैसे है, महिलाओं को नकाब कैसा पहनाना है बच्चों की इस तरह की शिक्षा के नाम पर ब्रेन-वाशिंग की जाती है नाजुक उम्र में उन्हें इस्लाम के नाम पर अरब पूजा सिखायी जाती हैं।

मदरसों में तो हालात और भी खराब हैं, उन्हें इस्लाम के नाम पर बुरी तरह शत्रुता का पाठ पढ़ाया जाता है। जिसके माध्यम से उन्हें हमेशा के लिए अरबों का गुलाम बना कर सारी दुनिया से नफरत करना सिखा दिया जाता है।

Islamic disputed points

हमारे यहाँ खुदा की कल्पना अरबों का दिया हुआ है पूजा का सारा सिस्टम ही अरबों की गुलामी के लिए चिंतनशील है। यहां तक कि बाथरूम में स्नान कैसे करना है, और अपने जीवन साथी के साथ संभोग का इस्लामी तरीका भी मासूम बच्चों को सिखाया जाता है।

Islamic

आप ही बताइये, कि जीवन का वह कौन सा क्षेत्र है जो आज अरब साम्राज्य के भयानक प्रभाव से सुरक्षित है? और ये हैं कि बसंत-पंचमी और वैलेंटाइन-डे के उल्लेख से ही इनके पेट में मरोड़ उठने लग जाती है।

ये तो यहाँ तक कहते हैं कि नास्तिक इसलिए आत्मघाती विस्फोट नहीं कर सकते क्योंकि वह तो मृत लोग हैं मुर्दे क्या खाक अल्लाह के रास्ते में दूसरों की जान लेंगे, और अपनी जान देंगे।

मासूम और निहत्थे इंसानों की जान लेने वाले और अल्लाह के रास्ते मनुष्य कहलाये जाने लायक तुम हो ही नहीं।

और सुनिए इनके समर्थक तो इनसे भी बड़े अपराधी हैं जो अल्लाह की राह में जिहाद का समर्थन करते हैं जब उनसे इस्लाम के अत्याचार की बात करो तो वह घुमा-फिरा कर पहली और द्वितीय विश्व-युद्ध पर आपको ले जाएंगे जैसे की हम Islamic अत्याचार का उल्लेख कर उनके युद्ध का समर्थन कर रहे हैं स्टालिन के अत्याचारों का जिक्र ऐसे होगा जैसे उसने यह सब कुछ हमारे इशारे पर लोगों को आजादी दिलाने के लिए किया हो।

सच बात तो यह है कि हम इस्लाम सहित ऐसे सभी तथाकथित दृष्टिकोण का मरते दम तक विरोध करेंगे जो मज़लूमों के साथ न्याय के नाम पर अन्याय करते हैं।


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