Pulwama attack | आप वही देखते हैं, जो आप देखना चाहते हैं।

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Pulwama attack 2019 के बाद की स्थिति पर

आप जो देखना चाहते हैं, आपको बस वही दिखता है!

लिट्टे/LTTE की मिसाल मत दीजिये। वे मुट्ठी भर लोग थे जिन्हें आराम से एक सरकार दबा सकती थी। खालिस्तानी मूवमेंट वाले भी मुट्ठी भर थे और जिस धर्म से वो आते थे उस धर्म यानि सिख धर्म की कुल आबादी पूरे विश्व में इस समय ढाई से तीन करोड़ है। सिखों का अपना कोई देश भी नहीं है इसलिए इस कम्युनिटी को लेकर ऐसा कहीं कोई अंतरराष्ट्रीय दबाव कभी नहीं रहा।

दुनिया के कुल 195 देशों में से 50 से अधिक मुस्लिम बाहुल्य देश हैं। इस दुनिया में दो अरब के क़रीब मुस्लिम आबादी है। शायद आपको इस्लामिक देशों की ताक़त का अंदाज़ा नहीं है। दुनिया का बड़े से बड़ा ब्रांड अपने प्रोडक्ट पर “हलाल” का ठप्पा क्यों लगाता है? किसके लिए लगता है?? आप अगर शाकाहारी हैं और यूरोप पहुंच जाएं तो वहां बड़े-बड़े होटल होने के बाद भी भूखे मर जाने की नौबत आ जाएगी। क्योंकि वहां आपको कहीं नहीं लिखा मिलेगा कि “आप हिंदुस्तान से आये हैं तो इस काउंटर पर आईये, यहां आपको शुद्ध “वैष्णवी भोजन मिलता है!”। लेकिन हर जगह ये जरूर लिखा मिल जाएगा कि “हलाल मीट यहां मिलता है!” या “हम पोर्क इस्तेमाल नहीं करते हैं!” इसी सब से आप समझ सकते हैं कि लोगो के अरब देशों से संबंध और उनका दबाव और दबदबा क्या है!

Pulwama attack 2019 के बाद की स्थिति को थोड़ा समझिए!

एक तरफ़ पाकिस्तान, दूसरी तरफ बांग्लादेश और फिर तीसरी तरफ़ सबका बाप चीन। जो मुहँ बाए इसी इंतज़ार में बैठा हुआ है कि कब भारत में अफरा-तफ़री मचे और वो इस मौके का फ़ायदा उठा ले। आप लिखते हैं कि “हमें वैसा करना चाहिए जैसे चीन अपने देश में मुसलमानों के साथ कर रहा है”।

एक न्यूज़ चीन की आप देख लेते हैं बस आपको लगने लगता है कि वहां मुसलमानों को टार्चर कैम्प में रखा जा रहा है। फिर आपको ये नहीं दिखता है कि चीन पाकिस्तान में अरबों-खरबों डॉलर का निवेश कर रहा है और उसे मज़बूत बना रहा है। क्योंकि आप बस वही देखते हैं जो आप देखना चाहते हैं।

Pulwama attack 2019 के बाद परमाणु अटैक के बाद का सोचा है कभी?

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Pulwama attack 2019 के बाद लोग लिख रहे हैं कि पाकिस्तान पर परमाणु बम मार दो। फिर उसके बाद हमारा क्या होगा इसका कुछ अंदाज़ा है आपको? कुछ पता भी है कि लगभग सारी दुनिया को हम अपने विरोध में खड़ा कर लेंगे… ये सब हंसी-मज़ाक़ है क्या? और अगर आप जानते हैं कि ये हंसी-मज़ाक़ नहीं है तो फिर ऐसे बेवकूफों की पोस्ट लाइक कर के शेयर क्यों करते हैं? अब अगर आप लोगों को इसी तरह की चुहलबाज़ी या बॉलीवुड टाइप स्क्रिप्ट में ही मज़ा आता है तो फिर आप फिल्मों में ही निपटते रहिये पाकिस्तान से… वही आपकी औक़ात है।

लेकिन अगर आप सीरियस हैं और चाहते हैं कि अब इन समस्याओं की जड़ से निपटा जाये तो थोड़ा विचार कीजिये… अपने चारो तरफ़ आंख खोल के देखिये… मोदी साहब ऐसे ही नहीं भाग कर पाकिस्तान नवाज़ शरीफ़ से मिलने पहुंच गए थे… जब व्यक्ति उस ऊंचे पद पर पहुंचता है तो फिर उसे अंतरराष्ट्रीय दबाव और अपनी स्थिति का अंदाज़ा होता है… चुनाव से पहले के उनके भाषण उठा लीजिये और आज़ उनको सुन लीजिए… ऐसे ही नहीं वो अरब के शेखों से अब गलबहियां करते रहते हैं।

ईस्राईल को अमेरिका और यूरोप का भयंकर समर्थन है
सबसे ज़्यादा ग्रांट अमेरिका इस्राईल को ही देता है इस्राईल एक यहूदी देश है
और यहूदियों की धार्मिक पुस्तक ‘तौरेत’ ईसाईयों की बाइबिल का अंश है
ये दोनों एक ही धर्म हैं इसे समझिए और हां, इस्लाम भी इन्हीं का हिस्सा है
क्योंकि वो भी इनके पैगम्बरों को मानता है। कहीं न कहीं ये सब एक ही हैं
मुसलमान ईसा को भी मानता है और यहूदियों के मूसा को भी
आज़ इस्राईल की जगह कोई अन्य देश वहां पर होता जिसके निवासी सेमेटिक धर्म के न होते
तो अब तक ये देश नक्शे से ही ग़ायब हो चुका होता।

हमारे साथ कौन है! नेपाल और भूटान? क्या हैसियत है इनकी??

भाई साहब गुस्सा हमें भी आता है, ख़ून हमारा भी खौलता है, जितने भारतीय आप हैं उतना हम भी हैं।
लेकिन हम ज़मीन पर रहकर सोचते हैं। हम बॉलीवुड मूवी से प्रेरणा लेकर “जै महिष्मति” के नारे नहीं लगाते
और आपको भी सलाह देते हैं कि आप भी धरातल पर रहकर सोचिए!
इस भस्मासुर मानसिकता से लड़ने के लिए अब हम सब साथ मिलकर सोचें और मिलकर लड़े तभी जीत पाएंगे।

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