6.9 C
Innichen
सोमवार, मई 17, 2021

Plate Tectonics | पृथ्वी के गर्भ की रोचक बातें

Must read

“हमारा विश्व उस पृथ्वी से नहीं बना जो इस पृथ्वी से पहले आयी थी, बल्कि हमारा विश्व उस पृथ्वी से बना है जो क्रम संख्या में तीसरे नंबर पर है। वो पृथ्वी समुद्र तल से ऊपर मौजूद पृथ्वी के नीचे थी और हमारी वर्तमान पृथ्वी उस समय समुद्रों के नीचे”। आपको कुछ समझ आया? उस समय भी किसी को समझ में नहीं आया था। 200 साल लगे हमें यह समझने में कि जेम्स हटन Plate Tectonics की बात कर रहे थे।

जबकि James Hutton ने 1795 में प्रकाशित अपनी पुस्तक “Theory of earth” में ये बताया था।

The Idea of Plate Tectonics

1726 में स्कॉटलैंड में जन्में और बागबानी का शौक रखने वाले जेम्स हटन ने नोटिस किया
कि मिट्टी चट्टान के घिसने से बनती है और यह मिट्टी बारिश द्वारा बहकर अन्ततः नदियों से होते हुए
समुद्र का हिस्सा बन जाती है। अब अगर पृथ्वी बेहद पुरानी है
और यह प्रक्रिया काफी लंबे समय से चल रही है, तो अब तक तो पृथ्वी के धरातल को
हर जगह से बेहद स्मूथ हो जाना चाहिए था, पर ऐसा है तो नहीं…

आज हम जानते हैं कि पृथ्वी की भूमि की ऊपरी परत कई टुकड़ों अथवा प्लेट्स में बंटी हुई है।
लावा के ऊपर तैरते यह टुकड़ें जब आपस में टकराते हैं तो भूकंप आते हैं, नयी पर्वतमालाएं जन्म लेती हैं।
पृथ्वी पर Plate Tectonics का योगदान सिर्फ भूकंप लाने तक सीमित नहीं।
हो सकता है कि Plate Tectonics ही “जीवन की मुख्य चाबी” हों।

लेकिन आज से 300 वर्ष पूर्व, अट्ठारहवीं शताब्दी में एक प्रश्न यूरोप में अक्सर पूछा जाता था कि पहाड़ों की चोटियों पर समुद्री सीपियाँ और कौड़ियां इत्यादि क्यों पाई जाती हैं? इस प्रश्न का एक उत्तर आस्तिकों लोगों के पास सिर्फ यह था कि हजरत नूह के समय आयी जल प्रलय के कारण ये समुद्री चीज़ें पहाड़ों की चोटियों तक पहुंच गईं थीं। वहीं दूसरा विरोधी ख़ेमा अक्सर यह तंज कसता था कि अगर किसी समय पृथ्वी पर इतना पानी था कि हजारों मीटर ऊंची पहाड़ियां तक जलमग्न हो गईं थीं तो आज वो सब पानी गया कहाँ? ज़मीन निगल गयी या आसमान?

बात तो ख़ैर वाज़िब थी और जेम्स हटन की खोज के बाद
भी इस विषय को समझने में 200 साल लग गए।

यानी कोई न कोई ऐसा मैकेनिज़्म है जिसके चलते नए-नए पहाड़ ऊपर उठकर अस्तित्व में आते हैं
और इसी तरह समुद्री सीपियाँ पहाड़ों की ऊंचाई तक पहुंच पाई हैं।

The Earth Inside Story

आज हम जानते हैं कि 2 अरब साल पहले से लेकर 75 करोड़ साल पहले तक पृथ्वी के सभी भूखंड एक-दूसरे के साथ थे और इस बीच जीवन, कोशिकाओं के रूप मात्र में मौजूद था। जैसे ही भूगर्भीय हलचलों के कारण भूखंड अलग होने शुरू हुए, वैसे ही फॉसिल्स रिकॉर्ड में जटिलतम जीव प्रकट होने लगते हैं। शायद करोड़ों वर्षों के नीरस इंतजार के बाद पैदा हुई नयी परिस्थितियों और वातावरण ने प्रकृति को जीवों में नए-नए बदलाव के लिए प्रेरित किया हो? यही इवोल्यूशन का भी आधार स्तंभ है – प्रत्येक जीव अपने वातावरण अनुसार गुण विकसित करता है। कम शब्दों में – जैव विविधता के लिए परिवर्तन अनिवार्य है।

ख़ैर, इस कहानी से हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि किसी चीज का ज्ञान होना एक बात है और उस ज्ञान को सरल भाषा में दूसरों तक पहुंचा पाना दूसरी बात है। अगर आप दूसरे मानक पर फ़ेल हैं तो आपके ज्ञानी होने का भी कोई लाभ नहीं।

अफसोस ये कि जेम्स हटन उस समय अपनी बात को सही ढंग से नहीं रख सके थे।

~विजय राज शर्मा

Thanks For Reading !!

- Advertisement -

More articles

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

- Advertisement -

Latest article