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रविवार, मई 16, 2021

Saree overrated aur glorified परिधान क्यों है?

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आज बहुत सारी भारतीय लड़कियों को साड़ी से परहेज क्यों है? जबकि भारत में एक अतिशयोक्ति के तहत यह माना जाता है कि महिला Saree में सबसे ज़्यादा Elegant या ख़ूबसूरत दिखती है। लोग बिना सोचे-समझे इस बात से सहमत कैसे हो जाते हैं?

आइये आज उन कारणों का अन्वेषण करते हैं जिन कारणों की वजह से आज लड़कियां साड़ी पहनने से परहेज करती हैं।

Saree से पहनने से परहेज क्यों है?

Saree हर महिला की Mobility को प्रभावित करती है।
आप इसे पहनकर दौड़ नहीं सकती। Saree आपकी चाल की स्वाभाविकता पर असर डालती है।
भगदड़ की स्थिति में महिलाएं सबसे अधिक संख्या में मारी जाती हैं,
उसका सबसे बड़ा कारण होता है यह परिधान जो आपको भागने नहीं देता।
जब आपको किसी (इन्सान या जानवर) से बचकर भागना हो अथवा किसी को खदेड़ कर पकड़ना हो,
तो Saree आपको कमज़ोर बना देती है।
इसी तरह आग लगने की स्थिति में भी Saree आपको आग की चपेट में लाती है।

Choice है या अनिवार्यता?

यह भी याद रखिए कि Saree आपके लिए Choice का मामला हो सकता है, लेकिन करोड़ों महिलाओं के लिए यह शादी के बाद पहनने का अनिवार्य पहनावा बना दिया गया है। वह भी हर मौसम में- चाहे पसीने वाली गर्मी हो, या कड़कड़ाती सर्दी हो या फिर बरसात हो। साड़ी पहन कर फ्री-हैण्ड काम करने में भी बहुत परेशानी होती है।

Saree-Pallu

साड़ी पहनने में भी उतनी आसान नहीं। सिल्क, कॉटन, शिफॉन हर तरह की साड़ियों को पहनने में अलग-अलग तरह की परेशानी होती है। एक तो इसमें पॉकेट भी नहीं होता। साड़ी को अक्सर लड़की और महिला में फर्क करने के तौर पर अथवा विवाहित-अविवाहित स्त्री में अंतर करने के लिए एक संकेतक की तरह भी स्थापित किया गया है, हां शहरों में उतना नहीं लेकिन गाँवों में अब भी होता देखा जा सकता है। घूँघट का कॉन्सेप्ट भी Saree से जुड़ा हुआ है। जैसे घूँघट महिलाओं पर पहरे, पाबंदी, पहचान, चरित्र से जोड़कर देखा जाता रहा है, उसी तरह इसे भी माना जाता है।

Saree पहनने को लेकर भी कई तरह की Myth बातें प्रचलित हैं। जैसे इसे संस्कार से जोड़कर देखना। महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध अथवा उनका मूल्यांकन किया जाता रहा है। जैसे नयी बहू के सिर पर पल्लू न होना, विधवा स्त्रियों के लिए यही साड़ी सफ़ेद रंग का बना दिया जाना भी एक अमानवीय करण है। तमाम Western पहनावे जैसे हाई हील, जापान में लड़कियों के जूते, विक्टोरियन ज़माने की कॉर्सेट जिसमें महिलाओं की जान तक चली जाती थी इत्यादि को गहराई से देखें तो पुरुष वर्चस्व द्वारा महिलाओं के लिए तय किये गए परिधान हैं।

अन्य परिधानों की तरह यह भी बस एक परिधान है। आपकी Choice और Freedom के साथ हो तो ठीक है, वर्ना यह एक Overrated और महिमामंडित करने वाला Cultural nostalgia है।


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