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सोमवार, मई 17, 2021

Spiritual meaning | आपकी आध्यात्मिकता कहां है?

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भारत में बहुगिनती उन लोगों की है, जो आध्यात्मिकता में यकीन रखते हैं और Spiritual meaning समझने और समझाने के फेर में रहते हैं, उनका विश्वास है कि इस दुनिया को किसी ईश्वर ने बनाया है, वही इसका संचालन करता है और वही इसे खत्म करेगा।

उनके इस मत का समर्थन करने वाले धार्मिक गिरोह लाखों की संख्या में कुकरमुत्तों की तरह जगह-जगह फैले हुए हैं। डेरावाद जैसे तथाकथित बाबाओं के संगठन भी उनके इस मत को मजबूत करने में जुटे हैं।

एक्चुली धर्मग्रंथों में ये Spiritual meaning समझाने के लिए ठूंस-ठूंस कर भरी गई है। कहने का अर्थ यह है कि यहां कदम-कदम पर आध्यात्मिक रंग दिखाया जाता है जो वास्तव में कहीं है नहीं। लोग ये कहते नहीं थकते कि भारत विश्व का आध्यात्मिक गुरु है। इन धार्मिक ग्रंथों एवं तथाकथित गुरुओं के हजारों वर्षों के अनवरत प्रचार के कारण लोगों के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, वह ईश्वर के इशारे पर हो रहा है, उसकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता, आदि-आदि।

अब विचार करने योग्य बात यह है कि मनुष्य जिसके ऊपर इतना अन्धा विश्वास करता है, क्या वह कभी इनकी मदद करने के लिए आता है?

अब एक बात समझने की कोशिश करिए – “जब हम कोई स्थान, ज़मीन, दुकान, मकान बनाते हैं, तो उसके बाद क्या करते हैं”?

भाई, हम उस स्थान विशेष पर खुद न रहने के बावजूद उसकी देखभाल समय-समय पर करते रहते हैं। तो इतने बड़े जहान के मालिक को, आपके अनुसार बनाने वाले को क्या कभी इतना भी समय न मिला कि वो इसकी देखभाल करने कभी यहां आता।

दरअसल हमने फिल्मों या टीवी सीरियल में या धार्मिक ग्रंथों में जो देखा-पढ़ा उसे सच मान कर ये समझ में डाल लिया कि जब मनुष्य पर कोई मुसीबत आती है, तो ईश्वर फौरन मदद को पहुंच जाता है। प्रार्थना या तपस्या के फलस्वरूप वह फौरन हाजिर हो जाता है। लेकिन वास्तविक जीवन में कभी वह किसी की मदद करने आया हो, ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। लोग दिन-प्रतिदिन घरों व मंदिरों में प्रार्थनाओं एवं कथा-कीर्तन में Spiritual meaning समझने के लिए जुटे पड़े हैं।

कुछ लोग तो कठिन पूजा-पाठ व घोर तपस्या भी करते हैं। क्या उसने किसी की पूजा-पाठ व तपस्या पर ध्यान दिया है? कुछ जुनूनी लोग तो भगवान व देवी-देवता को खुश करने के लिए अपनी जीभ तक को काट कर मूर्ति के सम्मुख चढ़ा देते हैं। यहां तक कि कुछ लोग तो अपना सम्पूर्ण शरीर ही उनकी भेंट चढ़ा देते हैं।

मैंने एक बार राजस्थान के एक परिवार का जिक्र किया था, जहां शिव को प्रकट कराने के लिए पूजा करते हुए पूरे परिवार ने अपने प्राण त्याग दिए थे। वे शिव को अपने सम्मुख बुलाना चाहते थे, लेकिन उन्हें न आना था, न ही वो आए।

इसे भी पढ़े: ईश्वर आख़िर जागता क्यों नहीं?

याद करिए आज से कई साल पहले एक विमान दुर्घटना हुई थी जिसमें सवार 100 लोगों में से 99 लोग मारे गए थे और केवल एक बच्चा संयोगवश बच गया था। फिर, अगले दिन अखबार का शीर्षक था- ‘जाको राखे सांईयां मार सके न कोय’। यानी उस बच्चे को भगवान ने बचा लिया था। यदि उसको बचाने वाला भगवान था तो 99 लोगों को मारने वाला कौन था? यदि उसमें बचाने की ताकत है, तो सभी को क्यों नहीं बचाया। और आप ही लोग कहते भी हैं कि “मारने वाला है भगवान, बचाने वाला है भगवान”।

वास्तविकता यह है कि हजारों वर्षों से लगातार हमारे धार्मिक ग्रंथ व पंडे-पुजारी यही मिथिहास हमारे दिमागों में घुसेड़ते जा रहे हैं, जिससे हमारे मस्तिष्क की तर्क-शक्ति व विवेक शक्ति जड़ हो गई है। धार्मिक पुस्तकों एवं फिल्म व टीवी के पर्दे से बाहर निकलकर वह कभी किसी की मदद करने को नहीं आया। आपकी आर्थिक तंगी में वह आपकी एक रुपए की भी मदद नहीं कर सकता। आपके बच्चे की प्रवेश परीक्षा में एक अंक भी ज्यादा नहीं दिलवा सकता। छोटी-छोटी बच्चियों के साथ कुकर्म हो रहे हैं, परन्तु वह बचाने नहीं आता। यहां तक कि धार्मिक स्थानों पर दुर्घटनाओं में लोग मर रहे हैं, वह किसी की मदद को नहीं आता। किसी दुख-संकट में, बीमारी में, आपदा में, यदि कोई आपकी मदद कर सकता है, तो वो हैं आप खुद, और इन समस्त संघर्षों से आपको खुद ही गुजरना पड़ता है। उसके आगे हाथ फैलाना बंद कीजिए। विवेक से काम लीजिए। हाथों की लकीरों पर नहीं, हाथों पर यकीन रखिए। मेहनत कीजिए और अपने परिवार, समाज व देश को खुशहाल कीजिए। यदि कोई समस्या है तो इसे भगवान के समक्ष नहीं, सरकार के समक्ष उठाइये। स्वयं को संगठित कीजिए, निश्चित तौर पर आपको सफलता मिलेगी।

अपने ऊपर विश्वास रखिए। दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो आप हासिल नहीं कर सकते।

~बलजीत भारती

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