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Monday, October 25, 2021

Stephen Hawking | ब्रह्मांड को किसने बनाया?

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Stephen Hawking Books: The Grand Design

नमस्ते, मेरा नाम Stephen Hawking है। और मैं एक Physicist (भौतिकविद),
Cosmologist (ब्रह्माण्ड विज्ञानी) और कुछ हद तक Dreamer (सपने देखने वाला) हूँ।
मैं चल फिर नहीं सकता और मैं एक कम्प्युटर के जरिये बोलता हूँ। लेकिन मैं मन से आज़ाद हूँ।
मैं ब्रहमाण्ड के सबसे बड़े सवालों का जायज़ा लेने के लिए आज़ाद हूँ।
और उनमें सबसे बड़ा सवाल भी है कि क्या कोई ईश्वर है?
जिसने ब्रह्माण्ड यानि तारों और ग्रहों से लेकर आपकी और हमारी भी रचना की है।
और जो सब को नियंत्रित भी करता है।

इसका पता लगाने के लिए हम प्रकृति के नियमों की यात्रा पर जाएंगे क्योंकि मुझे लगता है
कि वहीं इस पुराने सवाल का जवाब मौजूद है। कि ब्रह्माण्ड कैसे बना और ये कैसे काम करता है?

क्या ईश्वर ने ब्रह्मांड का निर्माण किया है? –Stephen Hawking Books

Stephen Hawking

मैंने सन 2010 में Stephen Hawking Books: The Grand Design प्रकाशित की है, जिसमें
सवाल है कि क्या ईश्वर ने ब्रह्माण्ड की रचना की है? इस पर थोड़ा विवाद भी हुआ, लोग नाराज़
हो गए कि धर्म के मामले में किसी वैज्ञानिक को टांग नहीं अड़ानी चाहिए। मैं किसी को नहीं
बताना चाहता कि उसे क्या मानना चाहिए, लेकिन मेरी नज़र में ये विज्ञान के लिए जायज़ सवाल है कि क्या ईश्वर का अस्तित्व है? Did God Create The Universe? ब्रह्माण्ड की रचना किसने की? और कौन इसे नियंत्रित करता है? इसकी बजाय ज्यादा महत्वपूर्ण और बुनियादी रहस्य पर विचार करना बेहतर है।

पुराने जमाने में इसका जवाब लगभग एक ही होता था। ईश्वर ने सब कुछ बनाया है, दुनिया एक डरावनी जगह थी। इसलिए वाइकिंग जैसे ताकतवर लोग भी बिजली कड़कने या तूफान जैसी कुदरती बातों को समझने के लिए अलौकिक शक्तियों के अस्तित्व में विश्वास रखते थे। वाइकिंग लोगों के कई अलग-अलग देवता थे थोर आसमानी बिजली के देवता थे।
एक और देवता एडेल समुद्री तूफान पैदा करते थे।

लेकिन वो स्कोल नाम के देवता से सबसे ज्यादा डरते थे वो देवता उस खौफ़नाक प्राकृतिक घटना के लिए जिम्मेदार थे जिसे हम आज सूर्यग्रहण कहते हैं। स्कोल को आसमान में रहने वाला भेड़िया देवता माना जाता था। कभी कभार वो सूर्य को खा लेते थे जिससे वो डरावना पल आता था जब दिन रात में बदल जाता था।

सूर्य को न देख कर कितनी परेशानी होती होगी?

Stephen Hawking- “कल्पना कीजिये कि वैज्ञानिक कारण नहीं जानने की वजह से सूर्य को गायब होते हुए देख कर लोगों को कितनी परेशानी होती होगी?” वाइकिंग लोग इसके जवाब में वही करते थे जो उन्हें सही लगता था। वो भेड़िये को डरा कर भगाने की कोशिश करते थे। वाइकिंग लोगों की मान्यता थी कि उनके चीखने-चिल्लाने से सूर्य लौट आता था। लेकिन अब हम जानते हैं कि उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं थी, सूर्य हर हाल में दोबारा निकल आता।

अब ये समझ में आ रहा है कि ब्रह्माण्ड उतना अलौकिक या रहस्यमय नहीं है जितना लगता है लेकिन इसकी सच्चाई को उजागर करने के लिए वाइकिंग लोगों से भी ज्यादा साहस की जरूरत है।

आज मामूली लोग भी समझ सकते हैं कि ब्रह्माण्ड कैसे काम करता है!

वाइकिंग लोगों से भी काफी पहले प्राचीन ग्रीस में इसका पता लगा लिया गया था। ईसा पूर्व 300 में एरिस्टार्गस नाम के एक दार्शनिक को भी ग्रहणों में गहरी दिलचस्पी थी, खास कर चन्द्र ग्रहणों में। उनमें ये सवाल करने का साहस था कि क्या वो सचमुच देवताओं के कृत्य थे? एरिस्टार्गस सचमुच वैज्ञानिक पहल करने वाले व्यक्ति थे, उन्होने आसमान का सावधानी से अध्ययन किया और एक बहुत बड़े नतीजे पर पहुंचे, उन्होने पाया की ग्रहण कोई अलौकिक घटना नहीं है, बल्कि चाँद के ऊपर से गुजरती पृथ्वी की परछाई है। इस खोज ने उन्हें पुरानी मान्यताओं से मुक्त कर दिया और वो आसमान में चल रही गतिविधियों को समझने और सूर्य, पृथ्वी और चाँद के बीच असली सम्बन्धों को दिखलाने वाले नक्शे बनाने में कामयाब रहे। वहाँ से वो और भी कमाल के नतीजों पर पहुंचे।

उन्होने ये अनुमान लगाया कि पृथ्वी ब्रहमाण्ड का केन्द्र नहीं थी जैसा की तब हर कोई मानता था बल्कि पृथ्वी खुद सूर्य की परिक्रमा करती है। असल में तो इस व्यवस्था को समझने से सभी ग्रहणों का कारण समझ में आ जाता है। जब चाँद की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है तो सूर्यग्रहण होता है। और जब चाँद पर पृथ्वी की परछाई पड़ती है तो चन्द्रग्रहण होता है। लेकिन एरिस्टार्गस इसे और आगे ले गए उन्होने ने कहा कि तारे आसमान की सतह पर पड़ी दरारे नहीं हैं जैसा की उनके समकालीन मानते थे, उन्होने कहा कि तारे असल में हमारे सूर्य जैसे ही दूसरे सूर्य हैं बस वह काफी दूर हैं।

सोचिए ये कितना विलक्षण बोध रहा होगा !!

क्रमश:

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