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Monday, October 25, 2021

Stinging thoughts | जीवन की कड़वी सच्चाईयां

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इस पृष्ठ पर हमने कुछ ऐसे Stinging thoughts को जोड़ा है, जो लगते तो साधारण हैं लेकिन ठहर कर सोचने पर मजबूर कर देते हैं। ये विचार जीवन की ऐसी कड़वी सच्चाईयां हैं जो चुभते हैं, शर्मिंदा करते हैं, कभी-कभी झझोड़ देते हैं और कुछ अलग हटकर सोचने पर मजबूर करते हैं। ये (Stinging thoughts) ‘चुभते विचार’ जीवन की कड़वी सच्चाईयां हैं!

यह समाज, हर जवान होते आदमी और औरत से सवाल करने का अभ्यस्त है कि “शादी कब कर कर रहे/रही हो?” ताकि विवाह के नाम पर परस्पर शोषण और अपमान की एक व्यवस्था का पोषण, जारी रह सके!

@आनंद के॰ कृष्ण

“मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना !” यह गीत हमेशा गलत सा साबित हुआ है, क्योंकि हमने जब से होश संभाला है, लोगों को मज़हब के नाम पर ही लड़ते देखा है!

@अज्ञात

“बचपन में किसी पन्ने पर लिखा पढ़ा करते थे कि, ”मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।” अब इस ‘बैर ना रखने‘ वाले पन्ने को बेचकर बेर खा लो”!

@वुसतुल्लाह ख़ान

“पत्रकार का डमी होता है चाटुकार। शायर का डमी होता है कायर”।

@आशुतोष उज्जवल

“कर्म करो, कांड नहीं “!

@आशुतोष उज्जवल

“मनुष्य अब सिर्फ़ जानवर है, सामाजिक नहीं”!

@आशुतोष उज्जवल

“अंदर के रावण को मारना आसान है, बाहर के रावण तो हाई सिक्योरिटी में रहते हैं”!

@आशुतोष उज्जवल

“शवयात्रा का नियम है कि कतार जैसे आगे से पीछे की तरफ जाती है, शोक का स्तर घटता चला जाता है”!

@राकेश कायस्थ

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