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Thursday, October 21, 2021

Swami लिखने का तात्पर्य क्या है?

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कई बार देखता हूँ कि लोगों को मेरे नाम और फोटो से भ्रम हो जाता है, कि मैं कोई धार्मिक व्यक्ति या गुरु हूँ
क्योंकि भारत में अधिकांशतः धार्मिक व्यवसाय से जुड़े गुरु और सन्यासी लोग Swami लगाते हैं,
परन्तु जब वो मेरा परिचय या मेरे धर्म और अन्धविश्वास के विरुद्ध लेख पढ़ते हैं,
तो उन्हें बड़ा अजीब लगता है कि ये कैसा Swami है?
वैसे तो भारत में बहुत से लोग Swami लिखते हैं और दक्षिण भारत में तो ये बहुत आम बात है।

Swami का क्या मतलब होता है?

मेरी जानकारी के अनुसार Swami का मतलब मालिक और अंग्रेजी में बोलें तो Owner या Master होता है।
मैंने किसी धर्म, व्यक्ति या भगवान को अपना Swami बनने की इज़ाज़त नहीं दी है,
और न ही किसी का स्वामित्व करना चाहा है। परन्तु मैं स्वयं का स्वामित्व अवश्य करता हूँ,
और ख़ुद मुख्तार अपना मालिक हूँ। क्या दिक्कत है किसी को इसमें?
आखिर मैं अपना Swami क्यों नहीं हो सकता क्योंकि न तो मैं किसी को अपना Swami बनाना चाहता हूँ
और न ही किसी का Swami बनना चाहता हूँ। मेरे तो सिद्धांत और दर्शन ही यही है
कि हर किसी को अपना Swami ख़ुद होना चाहिए
और किस्मत, स्वर्ग, पुनर्जन्म जैसे धार्मिक अंधविश्वासों के स्थान पर स्वयं अपनी जिम्मेदारी लेकर कर्मठ बनना चाहिए।

Swami Vs Guru

गुरु बनाने का सारा दर्शन ही यही है कि अब तुम्हें कुछ नहीं करना
अपनी सारी जिम्मेदारी गुरु पर डाल दो, वो तुम्हारा बेड़ा पार कर देंगे
बस दक्षिणा समय से जरूर पहुंचाते रहना। इसी तरह तो धर्म ने व्यक्ति को पंगु और नकारा बनाया है।
और गुरु लोग तो चेलों की सारी जिम्मेदारी फीस के साथ लेकर अय्याशियाँ कर रहे हैं।
यही धर्म के ठेकेदार Swami लोग ही गुरु बन जाते हैं और ये नहीं चाहते
कि कोई और Swami मतलब ख़ुद का मालिक बने, नहीं तो इनका धंधा कैसे चलेगा?
ये तो लोगों को लुंजपुंज और दास तथा सेवक बना के रखना चाहते हैं Swami नहीं।
कहने का तात्पर्य ये है कि मैं Swami शब्द को धार्मिक प्रकाश में न देखकर शब्दशः देखता हूँ।

Swami शब्द आस्तिकों से निकटता के लिए भी है!

एक और विचार भी इसके पीछे ये है कि अगर ये फोटो और नाम न हो तो केवल नास्तिक लोग ही मेरे चारों तरफ इकट्ठे हो जायेंगे और उनको तो मुझे कोई ज्यादा सन्देश देने की जरूरत है नहीं। मैं जो असल में लिखता हूँ वो तो आस्तिक और जो धर्म का दोगला चेहरा लगाए बैठे हैं अथवा धर्म और परम्पराओं के जाल में जकड़े हुए हैं, उनके लिए है कि उन्हें थोड़ी तो बात समझ में आये। तो जो लोग बिना परिचय पढ़े, धोखे से आ जाते हैं केवल नाम और फोटो देखकर उन्हें भली-भांति सही परिचय मिल जाता है।

भले ही थोड़ा पर कुछ सीख के जाते हैं, और आशा करता हूँ कि कभी तो वो समझेंगे और धर्म के द्वारा रचित भ्रम से बाहर निकलेंगे। क्योंकि इससे मैं खुद भी बाहर ही निकला हूँ, किसी समय में, मैं खुद भी बहुत बड़ा धार्मिक हुआ करता था, और मैंने भोगा है उसे, इसलिए आपबीती और स्वयं के अनुभव लिखता हूँ।

मैं स्वयं इस भ्रम से बाहर आया हूँ !

और बहुत खुश हूँ कि बाहर निकल आया उस भ्रम से। सत्यता यही है कि धर्म, गुरु और आस्था ये सब मेरा भूतकाल था इसी में जीया हूँ मैं तभी वर्तमान में अपने नाम के साथ “भूतपूर्व गुरु” भी लिखता हूँ। और वो गुरुबाजी चली भी बहुत अच्छी तरह, हजारों की भीड़ इकट्ठी करी और बड़े-बड़े पैसे वालों को भी देखा बड़े-बड़े मंत्री-संत्री, गवर्नर और पूर्व राष्ट्रपति भी प्रवचनों में आये, परन्तु जीवन में घटी कुछ घटनाओं ने दिल-दिमाग को बहुत झकझोर दिया था, और फिर ख़ुद की सोच तथा जीवन को जीने का सारा तरीका ही बदल गया। मैंने उन परिवर्तनों को खुले मन से स्वीकार किया और जीवन को नए ढंग व सिरे से जीना प्रारंभ किया तथा कई पड़ाव पार करके आज की स्थिति पर पहुंचा हूँ।

तुम भी धर्म के धोखे से बाहर निकलो !

आज एक प्यारी सी बच्ची का बाप हूँ और मेहनत (व्यापार) कर के कमाता खाता हूँ किसी भीख या दान का नहीं और अपने कार्य में हर तरह से सफल भी हूँ तथा प्रसन्न भी। आज वही लोगों को कहता हूँ कि यदि सच में खुश होना चाहते हो तो धर्म के धोखे से बाहर निकलो।

धर्म तो हमेशा शोषण ही करेगा, तुम्हे पापी और पतित ही बनाकर रखेगा, हमेशा उस अपराध के लिए तुम्हें ग्लानि में सड़ाएगा जो कि न तो तुमने किया है और जिसपर न ही कोई तुम्हारा वश था। धर्म केवल आस्था के धंधेबाजों को ही झूठा Swami बनाता है जो कि तुम्हारे ही पैसे पर मज़ा करेंगे और तुम्हें तो पापी, पतित, दीन-हीन, सेवक, दास बना देंगे। इस दृष्टि से देखें तो मेरे इस लक्ष्य में मेरा व्यक्तित्व सहायक ही होता है और अक्सर धार्मिक लोग भी नाम तथा फोटो देखकर पंगा लेने आ जाते हैं, और फिर खाली हाथ नहीं बल्कि कुछ तो ले के ही जाते हैं। अगर मेरा ये नाम और फोटो न हो और मैं भी सबकी तरह जींस टी-शर्ट पहनने लग जाऊं, तो कोई क्यों मेरे पास धर्म का कच्चा चिठ्ठा सुनने आएगा?

इसलिए आप ये कह सकते हैं कि मैंने अपने नाम के साथ ये “Swami” साजिशन लटका रखा है।

~बालेन्दु स्वामी

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