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शनिवार, जुलाई 24, 2021

Syria news | सीरिया संकट के पीछे क्या था?

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एक ओर सीरिया में सुन्नी मुसलमान मारे जा रहे थे। तो दूसरी तरफ सारी दुनिया के सुन्नी मुसलमान Syria news से परेशान थे। भारतीय मुसलमान दिन-रात वहां की वीभत्स तस्वीरें पोस्ट कर रहे थे जिनमें से ज़्यादातर तो फ़ेक थी, फिर भी मानता हूँ कि हालात वहां खराब तो थे।

लेकिन उन्हें ऐसा लगता है जैसे आज Syria news के मुताबिक़ वहां हालत आज खराब हुए थे। पहले जब अन्य धर्मों और पंथों के लोग ISIS द्वारा मारे जा रहे थे तब सब ठीक था।

कैसे वहाबी विचारधारा सीरिया को निगले जा रही थी?

सुन्नी मुस्लिम समुदाय में आज भी यही चलन देखने को मिलता है। जबकि यह आज से नहीं मैं हमेशा से देख रहा हूँ। सद्दाम हुसैन जब कुर्दों का नरसंहार कर रहा था और शियाओं को मार रहा था तब ये सब चुप थे। उसके बाद जैसे ही सद्दाम हुसैन पर हमला हुआ, बस तब इनका रोना-धोना शुरू हो गया। उस समय हमारे मोहल्लों में भी सद्दाम हुसैन के समर्थन में नारे लगते थे। ISIS के साथ भी यही हो रहा था। जब Syria news ने बताया था कि ISIS ने सीरिया में अपनी जड़ें मज़बूत कर ली हैं। तब से सोच कर देखिये!

क्या यह सब स्थानीय सुन्नियों के समर्थन के बिना हो रहा है?

क्या उन्होंने वहाँ बिना स्थानीय सुन्नियों के समर्थन के ऐसे ही अपनी जड़ें मज़बूत कर ली थी? वो ऐसे कैसे इतने बड़े संगठन के रूप में उभर गए? बिना वहां के लोगों के समर्थन के? ऐसे कैसे उनका ख़लीफ़ा घोषित हो गया? यही हाल तालिबान का हुआ था, यही हाल अलक़ायदा का हुआ था। ये सब बिना मुसलमानों के सपोर्ट के कभी खड़े ही नहीं हो सकते थे। और आप..!! और आप जैसे सुन्नी मुसलमानों के सपोर्ट से ISIS शिया और अन्य लोगों का नरसंहार कर रहा था।

जब पंजाब में आतंकवाद ख़त्म किया गया था तो वहां के तमाम बेगुनाह मारे गए थे। कश्मीर में भी यही सब हो रहा था। क्योंकि वहाँ के पंजाबियों और मुसलमानों ने आतंकियों को पनाह दी थी और आतंकी इन्ही के बीच से निकले थे। ऐसे ही सीरिया में हो रहा था। अब बेगुनाह तो मारे ही जायेंगे न… जिन्होने बगदादी को अपना ख़लीफ़ा चुना था और जो ये सोच रहे थे कि बगदादी अमेरिका पर हमला करके सारी दुनिया में इस्लामिक राज ले आएगा तो वो तो मरेंगे ही, मगर उनके साथ-साथ बेगुनाह भी मरेंगे..!

ISIS जब शियों को मार रहा था। बग़दाद से लेकर पाकिस्तान में जब रोज़ शियों को बम से उड़ाया जाता है तो सारी दुनिया के सुन्नी मुसलमान एकदम मौन रहते थे। लेकिन वे ये कभी नहीं सोचते थे कि अगर कोई शिया पॉवर में आ गया तो वो कभी न कभी इनसे बदला लेगा ही।

जब यहाँ थोड़ी नरम सरकार थी तब भारत में रोज़ बम विस्फ़ोट होते थे। बिना किसी वजह के.. बस ऐसे ही विस्फ़ोट किये जा रहे थे ताकि इस्लामिक राज्य की कल्पना को साकार किया जा सके। अब जब सख्त हिन्दुत्ववादी सरकार आई है तो उसके संगठन तो दिखाएँगे ही अपनी ताक़त… और इसमें बेगुनाह मुस्लिम भी पिसेंगे.. और वो इसलिए पिसेंगे क्योंकि ख़ुद को मॉडरेट कहने वाले मुस्लिम अपने लोगों द्वारा किये गए ज़ुल्मों के ख़िलाफ़ तब मौन थे..! अरे भाई… कैसे आपके घर में कोई आतंकी पैदा हो जाता है, और आपको पता नहीं चलता? कैसे आपका लड़का जेहादी संगठनों के संपर्क में आ जाता है, और आप जान ही नहीं पाते?

जेहादियों के समर्थन में अब क्यों नहीं आपका लड़का आ रहा है? आख़िर… ऐसे एकदम से सब कैसे बंद हो गया? शुरू से किस तरह की आइडियोलॉजी आपने अपने बच्चे को दी थी, जो उन्हें शियों, अहमदियों और काफिरों से नफरत हुई?

दरअसल, सुन्नी/वहाबी मुसलमान ये चाहते हैं कि सभी शिया मार डाले जाएँ, अहमदिया ख़त्म कर दिए जाएँ… सूफ़ी मर जाएँ… सारे नास्तिक मर जाएँ… सारे क़ाफ़िर मर जाएँ… क्योंकि इनकी आइडियोलॉजी के हिसाब से ये सब गुनाहगार हैं और ये शिर्क करने वाले लोग हैं… सच मानिए यही इनकी मूल सोच है.. और फिर इनकी इसी मूल सोच के हिसाब से इनके संगठन काम करते हैं… लेकिन जैसे ही कोई सवा सेर मिलता है इन्हें फ़ौरन इंसानियत याद आ जाती है… और तब, आप इन्हें समझाएं कि मामले की गहराई देखो तो ये आप पर ही गुस्सा हो जायेंगे… बस ये चाहते हैं, कि किसी भी तरह सारी दुनियां के लोग मिलकर सुन्नी मुसलमानों का मारा जाना रोक दें, बस…! एकदम आफ़त मचा देंगे… दिन-रात मस्जिद में दुआएं होने लगेगी..। बिल्कुल जैसे छोटे बच्चे होते हैं, कि हाथ-पैर पटक के रोने लगेंगे और ज़मीन पर लोट जायेंगे कि बस हमें ये खिलौना दे दो बस…! इनका बस वही हाल है… अगर इनको समझाओ कि जो कुछ भी हो रहा है वो तुम्हारे अपने लोगों द्वारा अपने धर्म द्वारा हो रहा है तो वो इन्हें दिखेगा नहीं…! ये हाथ-पैर पटक के रोयेंगे कि बस किसी तरह से इसे बंद करवा दो..! ये बाबरी मस्जिद टूटने पर हाथ-पैर पटक-पटक के रोयेंगे, ख़ूब आफ़त मचाएंगे.. और उधर बामियान में बुद्ध की मूर्ति को उड़ा दिया गया, तो ये चुपचाप चाकलेट खाते हुए मुस्कुरा कर देखते रहे।

शिया और अहमदिया भारत छोड़ के पाकिस्तान गए… क्योंकि ये दोनों पाकिस्तान ये सोच कर गए कि वहाँ ये आराम से अपने हम-मज़हब भाईयों के साथ रहेंगे… क्योंकि इन्हें डर था कि भारत में हिन्दू अगर बहुसंख्यक हो गया तो इन्हें मार डालेगा…! मगर हुआ इनकी सोच का उल्टा, पाकिस्तान में इनकी ये हालत हो गयी कि इनका वहां रहना दूभर हो गया…! जितने भी अच्छे शिया और अहमदिया हैं वो सब वहाँ से कनाडा और दूसरी जगह जा-जा कर बस गए… जिन यहूदियों और ईसाईयों को इन्होने पूरी उम्र अपना दुश्मन समझा ये उन्हीं के साथ चैन से रह रहे हैं… एक तरफ भारत का एक भी मुसलमान हिन्दुओं के डर से कहीं बाहर जा कर नहीं बसा… और दूसरी तरफ़ आधा पाकिस्तान लिबरल मुसलमानों से ख़ाली हो गया… भारत छोड़ के जो अपने भाईयों के पास गए थे, वो ही वहाँ अब दर-बदर हैं..।

ऐसे ही सीरिया में भी इन लोगों ने छुप-छुपा कर ISIS को खड़ा कर दिया… बस इस उम्मीद से कि उनका बगदादी शिर्क करने वाले शिया और दूसरे लोगों का सफाया कर देगा…! ज़रा सोचो, ख़लीफ़ा उसे चार लोगों ने तो मिलकर चुना नहीं होगा…? भाई…! उसका गुप-चुप अपार जन समर्थन था।

इसलिए अब शिया पॉवर में आएगा तो आपको मारेगा ही… वो आपसे चुन-चुन कर बदला लेगा… क्योंकि आप सदियों से उसे मार रहे हैं… ऐसे ही हिन्दू भी बदला लेगा क्योंकि आपने उन्हें भी दुत्कारा है… यहूदी भी लेगा क्योंकि चौदह सौ साल से आप उसे भी अपना दुश्मन समझते रहे हैं… ईसाई भी लेगा… क्योंकि आप ने उसे भी दुश्मन समझा है…! जबकि इनमें से कोई भी आपका दुश्मन नहीं था आपने उसे अपना दुश्मन बनाया है। क्योंकि आपने अपने धर्म और अपनी सोच को हमेशा से दूसरों पर थोपने की कोशिश की है… आपने ही ज़बरदस्ती ईसाईयों की बाइबिल और यहूदियों की तौरेत को जाली और नकली बता दिया। चौदह सौ साल से आप यही कर रहे हैं.. आप ने हर किसी की पूजा पद्धति को सिरे से खारिज कर के अपनी ही पूजा को श्रेष्ठ बताया है और आप यहाँ भी रुके नहीं बल्कि आपने सभी धर्मों और सभी पंथों से हमेशा नफ़रत की और आज भी कर रहे हैं…! बताइये, और लोगों के साथ आप इस मानसिकता के साथ कैसे जियेंगे?

आप सोचेंगे कि Syria news से इस का क्या लेना-देना है?

बस… आप यहीं तो चूक जाते हैं.. अपने धर्म के नाम पर आपने ये जो अंधी नफ़रत पूरे विश्व में परोसी है.. पचास से अधिक देश आपने अपनी इस्लामिक आइडियोलॉजी पर खड़े किये और वहां के जितने भी सेक्युलर और अन्य धर्मों के लोग थे उन्हें या तो भागना पड़ा या फिर आपका धर्म स्वीकारना पड़ा… और ये सब आपने प्यार-मोहब्बत से तो किया नहीं…! अभी भी आप वही कर रहे हैं… औरों के बारे में क्या कहें आप अपने पंथों के अन्य लोगों को मार देते हैं जो आपके हिसाब से गुनाहगार होते हैं…! जहाँ आपका राज आता है वहां आप क़व्वाल साबरी जैसों को तो मार देते हैं… आप सूफ़ियों को मार देते हैं… अरे… आपके बीच कोई तो हो जो चैन से जी पाए?

आज के Syria news में दिख रही सीरिया… आपकी अपनी पैदाइश है, आप सब सुन्नी और वहाबियों ने इसे मिलकर पैदा किया है। आपके अपने धर्म और उसकी आइडियोलॉजी का विकृत और घिनौना रूप है ये। तो इसे गौर से देखिये जी भर के देखिये और रोते रहिये। क्योंकि जो मूल समस्या है आपकी नफ़रत की उसे तो आप कभी समझिएगा नहीं। आपके जेहादी इस्लामिक संगठन कुछ दिनों बाद बग़दाद में विस्फ़ोट कर के फिर दो-चार सौ शियाओं को मार डालेंगे बस तब आप सुकून पा जायेंगे। ऐसे ही आपको हमेशा सुकून मिलता है और ऐसे ही मिलेगा। तो थोड़ा इंतज़ार कर लीजिये।

कभी आप ये नहीं चाहते हैं कि आपके इस्लामिक संगठन और आपकी इस्लामिक सरकारें शियों, अहमदियों, काफिरों, समलैंगिकों, नास्तिकों, मुशरिकों को न मारें। आपको हमेशा से उनका मारा जाना भीतर तक सुकून देता आया है। चौदह सौ सालों से… और आप सिर्फ़ ये चाहते हैं कि बस आपके सुन्नी/वहाबी भाई कहीं न मारें जायें!

आज के Syria news की यही मूल समस्या है जो आपको कभी समझ में नहीं आती, यदि समझ में आ जाए तो इस समस्या पर गौर करिएगा !

~ताबिश सिद्धार्थ

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